भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन
भारतीय निशानेबाजी जगत को 12 जून 2026 को बड़ा झटका लगा, जब देश के महान पिस्टल निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनका इलाज चल रहा था। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी मृत्यु हृदय संबंधी जटिलताओं, जिनमें नींद के दौरान अचानक कार्डियक रप्चर और धमनी में अवरोध शामिल था, के कारण हुई। जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में उन्होंने भारतीय खेल जगत को अमूल्य योगदान दिया।
भारतीय निशानेबाजी में जसपाल राणा का योगदान
जसपाल राणा का नाम भारत के सबसे सफल पिस्टल निशानेबाजों में शामिल है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अनेक पदक जीते और देश का गौरव बढ़ाया। उनके शानदार करियर में चार एशियाई खेल स्वर्ण पदक और 15 राष्ट्रमंडल खेल पदक शामिल हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। उनकी उपलब्धियों ने भारत में शूटिंग खेल को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोच के रूप में भी छोड़ी अमिट छाप
खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने कई युवा निशानेबाजों को प्रशिक्षण दिया और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सबसे चर्चित उपलब्धियों में भारतीय निशानेबाज मनु भाकर को प्रशिक्षण देना शामिल है। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर ने दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह स्वतंत्रता के बाद एक ही ओलंपिक संस्करण में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी थीं। इस सफलता में जसपाल राणा के मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुरस्कार और सम्मान
भारतीय खेलों में उनके उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
- वर्ष 1994 में अर्जुन पुरस्कार
- वर्ष 1997 में पद्म श्री
- वर्ष 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार
अर्जुन पुरस्कार भारत का प्रमुख खेल सम्मान है, जबकि द्रोणाचार्य पुरस्कार उत्कृष्ट प्रशिक्षकों को प्रदान किया जाता है। ये सम्मान उनके खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में असाधारण योगदान का प्रमाण हैं।
भारतीय खेलों के लिए बड़ी क्षति
जसपाल राणा ने अपने पूरे जीवन में भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने न केवल स्वयं पदक जीते, बल्कि नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका निधन भारतीय खेल जगत, विशेष रूप से निशानेबाजी समुदाय के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी उपलब्धियां और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जसपाल राणा भारत के प्रसिद्ध पिस्टल निशानेबाज थे।
- उन्होंने एशियाई खेलों में 4 स्वर्ण पदक जीते थे।
- राष्ट्रमंडल खेलों में उनके नाम 15 पदक दर्ज हैं।
- उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार और 1997 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
- वर्ष 2020 में उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किया गया।
- आईएसएसएफ वर्ल्ड कप का आयोजन इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन द्वारा किया जाता है।
जसपाल राणा का जीवन भारतीय खेल इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है। एक सफल खिलाड़ी, प्रेरणादायक कोच और समर्पित खेल व्यक्तित्व के रूप में उन्होंने जो विरासत छोड़ी है, वह भारतीय निशानेबाजी को लंबे समय तक दिशा देती रहेगी। उनके योगदान और उपलब्धियों को देश सदैव सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करेगा।