भारतीय एमएसएमई के लिए ‘गोइंग ग्लोबल’ गाइडबुक लॉन्च, निर्यात और वैश्विक बाजार तक पहुंच होगी आसान

भारतीय एमएसएमई के लिए ‘गोइंग ग्लोबल’ गाइडबुक लॉन्च, निर्यात और वैश्विक बाजार तक पहुंच होगी आसान

भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 16 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में “गोइंग ग्लोबल: ए प्रैक्टिकल गाइड फॉर इंडियन एमएसएमई” नामक गाइडबुक का शुभारंभ किया गया। इस गाइडबुक को भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (सीटीआईएल) ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से तैयार किया है। इसका उद्देश्य भारतीय एमएसएमई को निर्यात, अंतरराष्ट्रीय बाजारों, वैश्विक व्यापार नियमों और व्यापारिक अवसरों की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है।

भारत में एमएसएमई का महत्व

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनका वर्गीकरण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 के अंतर्गत निवेश और वार्षिक कारोबार (टर्नओवर) के आधार पर किया जाता है। इस क्षेत्र में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा (सर्विस) दोनों प्रकार के उद्यम शामिल हैं। एमएसएमई रोजगार सृजन, औद्योगिक उत्पादन और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं तथा भारत की आर्थिक वृद्धि में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गाइडबुक की प्रमुख विशेषताएं

यह गाइडबुक भारतीय एमएसएमई को निर्यात संबंधी व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। इसमें निर्यात के अवसरों की पहचान, बाजार तक पहुंच की आवश्यकताएं, व्यापारिक जानकारी (ट्रेड इंटेलिजेंस), अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) से जुड़े नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसके अलावा बाजार विश्लेषण, विदेशी खरीदारों की पहचान तथा कम लागत में बाजार अनुसंधान करने के लिए उपलब्ध निःशुल्क डिजिटल उपकरणों के उपयोग की जानकारी भी शामिल की गई है। इससे छोटे उद्यमों के लिए वैश्विक व्यापार में प्रवेश करना अधिक सरल होगा।

एमएसएमई की चुनौतियां और समाधान

भारतीय एमएसएमई अक्सर सीमित बाजार जानकारी, विदेशी खरीदारों तक पहुंच की कमी, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों के अनुपालन और मूल्य प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना करते हैं। यह गाइडबुक इन समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रदान करती है। साथ ही यह बताती है कि किस प्रकार उद्यम वैश्विक मानकों का पालन कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ा सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सफलतापूर्वक प्रवेश कर सकते हैं।

मुक्त व्यापार समझौते और व्यापारिक सुरक्षा

गाइडबुक के लोकार्पण के अवसर पर भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और प्राथमिकता प्राप्त मूल नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) पर एक विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। इसके साथ ही ट्रेड रेमेडीज एडवाइजरी सेल पर भी प्रस्तुति दी गई, जो अनुचित व्यापारिक गतिविधियों, डंपिंग और आयात में अचानक वृद्धि जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यापारिक कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उद्योगों को सहायता प्रदान करने का कार्य करता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (सीटीआईएल) भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) में कार्यरत एक प्रमुख व्यापार अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र है।
  • भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) भारत के प्रमुख उद्योग संगठनों में से एक है, जो सरकार और उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • रूल्स ऑफ ओरिजिन का उपयोग मुक्त व्यापार समझौतों के अंतर्गत किसी उत्पाद के मूल देश का निर्धारण करने के लिए किया जाता है, ताकि उसे रियायती शुल्क का लाभ मिल सके।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ट्रेड रेमेडीज के अंतर्गत एंटी-डंपिंग, काउंटरवेलिंग और सेफगार्ड उपाय शामिल होते हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को अनुचित व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा प्रदान करना है।

‘गोइंग ग्लोबल’ गाइडबुक भारतीय एमएसएमई के लिए वैश्विक व्यापार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज साबित हो सकती है। यह न केवल निर्यात क्षमता बढ़ाने में सहायता करेगी, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर भी प्रदान करेगी। इससे भारत के निर्यात, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

Originally written on July 17, 2026 and last modified on July 17, 2026.

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