बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक कुकू कोहली का निधन, 90 के दशक की फिल्मों की यादें ताजा
हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ फिल्मकार अवतार ‘कुकू’ कोहली का मुंबई में 77 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें 25 अगस्त 2026 को दिल का गंभीर दौरा पड़ा और उन्होंने अंधेरी स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स’ एसोसिएशन के अध्यक्ष अभय सिन्हा और फिल्मकार अशोक पंडित ने की।
राज कपूर के साथ शुरू हुआ फिल्मी सफर
कुकू कोहली ने हिंदी सिनेमा में कई दशकों तक काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राज कपूर के सहायक निर्देशक के रूप में की थी। राज कपूर भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्मकारों में गिने जाते हैं और उनके साथ काम करना कई तकनीशियनों व निर्देशकों के लिए सीखने का बड़ा अवसर माना जाता था।
बाद में कोहली ने व्यावसायिक हिंदी फिल्मों के निर्देशन में अपनी अलग पहचान बनाई। 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में उनकी फिल्मों ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई, खासकर एक्शन और पारिवारिक मनोरंजन के मिश्रण के कारण।
‘फूल और कांटे’ से मिली पहचान
कुकू कोहली ने 1991 में ‘फूल और कांटे’ से निर्देशन की शुरुआत की। यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर चर्चित रही, बल्कि इसी के साथ अजय देवगन ने हिंदी सिनेमा में बतौर नायक कदम रखा। फिल्म का एक्शन, संगीत और नए चेहरे की एंट्री उस दौर की चर्चित घटनाओं में शामिल रही।
इसके बाद कोहली ने ‘सुहाग’ (1994), ‘हक़ीक़त’ (1995), ‘अनाड़ी नंबर 1’ (1999) और ‘वो तेरा नाम था’ (2004) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने मुख्यधारा के दर्शकों को ध्यान में रखकर कहानी कहने की शैली विकसित की।
परिवार और फिल्म जगत से जुड़ाव
कुकू कोहली का विवाह 1990 में अभिनेत्री अरुणा ईरानी से हुआ था। उनके पीछे पत्नी और पहली शादी से दो बेटियां—पूजा और करिश्मा—रह गई हैं। अरुणा ईरानी हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री हैं और लंबे समय से फिल्म जगत में सक्रिय रही हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कुकू कोहली ने अपने करियर की शुरुआत राज कपूर के सहायक निर्देशक के रूप में की थी।
- ‘फूल और कांटे’ 1991 में रिलीज हुई थी और इसी फिल्म से अजय देवगन ने बतौर नायक शुरुआत की थी।
- कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल मुंबई के अंधेरी इलाके में स्थित एक प्रमुख निजी अस्पताल है।
- अरुणा ईरानी हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों की वरिष्ठ अभिनेत्री हैं।
कुकू कोहली का निधन हिंदी फिल्म उद्योग के उस दौर की याद दिलाता है, जब व्यावसायिक सिनेमा में एक्शन, भावनात्मक कहानी और स्टार लॉन्चिंग का खास महत्व था। उनकी फिल्मों ने 1990 के दशक के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।