बॉन जलवायु सम्मेलन में अनुकूलन वित्त बढ़ाने की मांग

बॉन जलवायु सम्मेलन में अनुकूलन वित्त बढ़ाने की मांग

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय के तहत आयोजित बॉन जलवायु सम्मेलन (एसबी64) 8 जून से 18 जून 2026 तक जर्मनी के बॉन शहर में आयोजित किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और संगठनों ने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों की सहायता के लिए सार्वजनिक और अनुदान-आधारित अनुकूलन वित्त को वर्ष 2035 तक बढ़ाकर कम से कम 120 अरब डॉलर वार्षिक करने की मांग की है। यह प्रस्ताव जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से निपटने की वैश्विक आवश्यकता को दर्शाता है।

क्या है अनुकूलन वित्त?

अनुकूलन वित्त वह वित्तीय सहायता है जिसका उपयोग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से होने वाली क्षति और जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है। इसमें अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा, समुद्र स्तर में वृद्धि और चरम मौसम की घटनाओं से बचाव के उपाय शामिल होते हैं। यह वित्त स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने, स्वच्छता व्यवस्था सुधारने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने तथा आपदा तैयारी को सुदृढ़ करने में उपयोग किया जाता है। अनुकूलन वित्त, शमन वित्त से अलग होता है। जहां शमन वित्त का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना है, वहीं अनुकूलन वित्त का उद्देश्य जलवायु प्रभावों के प्रति समाज की संवेदनशीलता कम करना है।

120 अरब डॉलर के लक्ष्य की पृष्ठभूमि

यह नया लक्ष्य 2021 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉप26 सम्मेलन में निर्धारित 40 अरब डॉलर के अनुकूलन वित्त लक्ष्य का लगभग तीन गुना है। ग्लोबल क्लाइमेट एंड हेल्थ एलायंस ने बॉन सम्मेलन के दौरान इस मांग को प्रमुखता से उठाया। संगठन की नीति प्रमुख जेस बीगले ने कहा कि स्वास्थ्य प्रणालियों, जल संसाधनों, स्वच्छता, आपदा तैयारी और खाद्य प्रणालियों में निवेश बढ़ाना जलवायु अनुकूलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका मानना है कि पर्याप्त वित्तीय सहायता के बिना विकासशील देशों के लिए जलवायु संकट से निपटना कठिन होगा।

कॉप30 और कॉप31 की भूमिका

नवंबर 2025 में ब्राजील के बेलेम में आयोजित कॉप30 सम्मेलन में भी वर्ष 2035 तक अनुकूलन वित्त को कम से कम 120 अरब डॉलर वार्षिक तक पहुंचाने के प्रयासों पर जोर दिया गया था। यह लक्ष्य व्यापक 300 अरब डॉलर जलवायु वित्त योजना से भी जुड़ा हुआ है। बॉन सम्मेलन को आगामी कॉप31 की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। कॉप31 का आयोजन 9 से 20 नवंबर 2026 तक तुर्किये के अंताल्या शहर में किया जाएगा। यहां जलवायु वित्त, अनुकूलन रणनीतियों और वैश्विक सहयोग पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

वैश्विक अनुकूलन लक्ष्य पर चर्चा

बॉन सम्मेलन में पेरिस समझौते के अंतर्गत निर्धारित वैश्विक अनुकूलन लक्ष्य पर भी चर्चा हो रही है। सम्मेलन के एजेंडे में कॉप30 में स्वीकृत 59 संकेतकों को लागू करने की प्रक्रिया शामिल है। इन संकेतकों का उपयोग यह मापने के लिए किया जाएगा कि विभिन्न देश जलवायु अनुकूलन के क्षेत्र में कितनी प्रगति कर रहे हैं। इन संकेतकों के माध्यम से जलवायु जोखिम प्रबंधन, स्वास्थ्य सुरक्षा, जल संसाधन संरक्षण और आपदा तैयारी जैसे क्षेत्रों में सुधार का आकलन किया जाएगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (यूएनएफसीसीसी) को 1992 में अपनाया गया था और यह 1994 में लागू हुआ। ” कॉप का पूर्ण रूप ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज’ है, जो यूएनएफसीसीसी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। ” अनुदान-आधारित वित्त को वापस नहीं करना पड़ता और इसका उपयोग मुख्य रूप से विकासशील देशों में जलवायु अनुकूलन परियोजनाओं के लिए किया जाता है। ” बॉन जलवायु सम्मेलन को औपचारिक रूप से यूएनएफसीसीसी के सहायक निकायों का सत्र कहा जाता है। बॉन जलवायु सम्मेलन 2026 वैश्विक जलवायु नीति निर्धारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अनुकूलन वित्त को बढ़ाने की मांग यह दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से भी सीधे जुड़े हुए हैं। आने वाले वर्षों में पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता जलवायु संकट से निपटने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

Originally written on June 8, 2026 and last modified on June 8, 2026.

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