बेंगलुरु पुलिस ने शुरू की बहुभाषी एआई आपातकालीन सेवा
भारत में पहली बार बेंगलुरु सिटी पुलिस ने अपनी ‘नम्मा 112’ आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) समाधान से अपग्रेड किया है। इस नई पहल का उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों के दौरान भाषा संबंधी बाधाओं को समाप्त करना और सभी नागरिकों व आगंतुकों को तेज, सटीक और आसान पुलिस सहायता उपलब्ध कराना है।
बेंगलुरु जैसे महानगर में देश-विदेश के लोग रहते हैं, जहां अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोगों के लिए आपातकालीन सहायता प्राप्त करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस नई तकनीक से यह समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
वांकी प्रणाली की शुरुआत
इस नई एआई प्रणाली का नाम मल्टीलिंगुअल वॉइस एआई फॉर नेशनवाइड की इंटरवेंशंस (VANKI) रखा गया है। इसे ‘नम्मा 112’ हेल्पलाइन के साथ जोड़ा गया है ताकि कॉल करने वाला व्यक्ति अपनी सुविधाजनक भाषा में अपनी समस्या बता सके।
इससे आपातकालीन स्थिति में घबराहट के बीच भाषा को लेकर होने वाली परेशानी कम होगी और सहायता मांगना अधिक सरल हो जाएगा।
रियल टाइम भाषा अनुवाद
VANKI कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से कॉलर की बात को तुरंत समझता है और उसका रियल टाइम अनुवाद करता है। इसके बाद यह जानकारी आपातकालीन कॉल हैंडलर तक तुरंत पहुंचा दी जाती है।
इससे पुलिस, एंबुलेंस या अग्निशमन सेवाओं को तेजी से भेजा जा सकता है। समय पर सही जानकारी मिलना आपातकालीन सेवाओं की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है, और यह प्रणाली उसी को मजबूत बनाती है।
भारतीय और विदेशी भाषाओं का समर्थन
यह एआई प्लेटफॉर्म वर्तमान में 10 से अधिक भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसमें बंगाली, गुजराती, ओड़िया, मणिपुरी, कश्मीरी, नेपाली और असमिया जैसी भारतीय भाषाएं शामिल हैं।
साथ ही स्पेनिश, फ्रेंच और अरबी जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का भी समर्थन किया गया है, जिससे विदेशी नागरिकों, छात्रों और पर्यटकों को भी सहायता लेने में आसानी होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 112 भारत की राष्ट्रीय आपातकालीन हेल्पलाइन है, जो ERSS के अंतर्गत संचालित होती है।
- नम्मा 112 बेंगलुरु की एकीकृत पुलिस आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली है।
- VANKI का पूरा नाम Multilingual Voice AI for Nationwide Key Interventions है।
- बेंगलुरु भारत का पहला शहर बना है जिसने आपातकालीन हेल्पलाइन में बहुभाषी एआई का उपयोग शुरू किया।
बेंगलुरु पुलिस की यह पहल सार्वजनिक सुरक्षा सेवाओं को अधिक समावेशी, सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भाषा की बाधा हटने से प्रवासी, छात्र, श्रमिक और विदेशी नागरिक भी बिना डर और झिझक के आपातकालीन सहायता प्राप्त कर सकेंगे। यह भविष्य की स्मार्ट और संवेदनशील पुलिस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।