बंडीबुग्यो वायरस की जांच के लिए डब्ल्यूएचओ ने पहले आणविक डायग्नोस्टिक टेस्ट को दी आपातकालीन सूची में मंजूरी
वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2 जुलाई 2026 को बंडीबुग्यो वायरस के लिए पहले आणविक डायग्नोस्टिक (मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक) टेस्ट को अपनी इमरजेंसी यूज़ लिस्टिंग (Emergency Use Listing – EUL) में शामिल किया। यह परीक्षण रक्त के नमूनों में वायरस की आनुवंशिक सामग्री की पहचान कर संक्रमण की प्रयोगशाला स्तर पर पुष्टि करने में सक्षम है। इस मंजूरी से बंडीबुग्यो वायरस से होने वाले इबोला रोग की त्वरित और सटीक पहचान में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
बंडीबुग्यो वायरस क्या है?
बंडीबुग्यो वायरस इबोलावायरस (Ebolavirus) वंश की एक प्रजाति है, जो मनुष्यों में इबोला रोग का कारण बनती है। इस वायरस की पहली पहचान 2007 में युगांडा में हुई थी। यह वायरस ज़ैरे इबोलावायरस से अलग है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध कई लाइसेंस प्राप्त इबोला उपचार और जांच प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से ज़ैरे स्ट्रेन के लिए विकसित किए गए हैं। यही कारण है कि बंडीबुग्यो वायरस के लिए अलग और विशेष जांच प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई।
इमरजेंसी यूज़ लिस्टिंग का महत्व
इमरजेंसी यूज़ लिस्टिंग (EUL) डब्ल्यूएचओ की एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान ऐसे चिकित्सा उत्पादों का मूल्यांकन किया जाता है जिन्हें अभी पूर्ण लाइसेंस प्राप्त नहीं हुआ है। मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक परीक्षण न्यूक्लिक एसिड पहचान तकनीक का उपयोग करते हैं, जिससे रोगजनक के आरएनए या डीएनए की सटीक पहचान की जा सकती है। नया परीक्षण विशेष रूप से बंडीबुग्यो वायरस की पुष्टि के लिए विकसित किया गया है और प्रकोप की स्थिति में प्रयोगशाला जांच की क्षमता को बढ़ाएगा।
वर्तमान प्रकोप और सार्वजनिक स्वास्थ्य स्थिति
2 जुलाई 2026 तक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में बंडीबुग्यो वायरस से जुड़े 1,406 प्रयोगशाला-पुष्ट मामले और 438 मौतें दर्ज की गई थीं। इसे बंडीबुग्यो वायरस से होने वाले इबोला रोग का अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप माना गया है। इसके मद्देनज़र 17 मई 2026 को डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency of International Concern – PHEIC) घोषित किया था।
जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि
प्रकोप से प्रभावित क्षेत्रों में प्रयोगशाला जांच क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। जहां प्रारंभिक चरण में प्रतिदिन केवल 200 से 400 परीक्षण किए जा सकते थे, वहीं अब 10 प्रयोगशालाओं के माध्यम से प्रतिदिन 2,000 से अधिक परीक्षण किए जा रहे हैं। इससे संक्रमण की शीघ्र पहचान, रोगियों के उपचार और संक्रमण नियंत्रण उपायों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।
हालिया निगरानी और स्वास्थ्य अपडेट
युगांडा में 21 जून 2026 के बाद इबोला का कोई नया मामला दर्ज नहीं किया गया। हालांकि, 30 जून 2026 को युगांडा के क्येगेगवा जिले में मारबर्ग वायरस रोग का एक पुष्ट मामला सामने आया। मारबर्ग वायरस भी फिलोवायरस परिवार से संबंधित है, लेकिन यह इबोला वायरस से अलग वायरस है और अलग रोग उत्पन्न करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बंडीबुग्यो वायरस इबोलावायरस वंश की एक प्रजाति है और यह मनुष्यों में इबोला रोग का कारण बनता है।
- इमरजेंसी यूज़ लिस्टिंग (EUL) सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान चिकित्सा उत्पादों के मूल्यांकन की डब्ल्यूएचओ की विशेष प्रक्रिया है।
- पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC), अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (2005) के तहत जारी किया जाने वाला सर्वोच्च वैश्विक स्वास्थ्य अलर्ट है।
- मारबर्ग वायरस रोग इबोला से अलग फिलोवायरस के कारण होता है, हालांकि दोनों रोगों के लक्षण कई मामलों में समान हो सकते हैं।
बंडीबुग्यो वायरस के लिए पहले मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट को डब्ल्यूएचओ की इमरजेंसी यूज़ लिस्टिंग में शामिल किया जाना वैश्विक महामारी निगरानी और त्वरित रोग पहचान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे प्रभावित देशों में समय पर निदान, बेहतर उपचार प्रबंधन और संक्रमण नियंत्रण रणनीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी।