तक्षशिला विश्व धरोहर परिसर में संरक्षण कार्य पर यूनेस्को की पाकिस्तान को चेतावनी

तक्षशिला विश्व धरोहर परिसर में संरक्षण कार्य पर यूनेस्को की पाकिस्तान को चेतावनी

पाकिस्तान को 2 जुलाई 2026 को यूनेस्को की ओर से तक्षशिला विश्व धरोहर परिसर के दो महत्वपूर्ण स्थलों—मोहरा मोराडू और सिरकप—में किए गए संरक्षण एवं पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर चेतावनी दी गई। यूनेस्को ने इन स्थलों पर कथित पुनर्निर्माण कार्यों को वापस लेने तथा संरक्षण संबंधी विस्तृत दस्तावेज, प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट और पुनर्स्थापन से पहले एवं बाद की तस्वीरें उपलब्ध कराने को कहा है। यह मामला विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन से जुड़ा हुआ है।

तक्षशिला विश्व धरोहर परिसर का महत्व

तक्षशिला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है। इसे 1980 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। यह परिसर गांधार सभ्यता के अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है, जो लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व से पाँचवीं शताब्दी ईस्वी तक वर्तमान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में विकसित हुई थी। तक्षशिला प्राचीन काल में शिक्षा, संस्कृति, व्यापार और बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र माना जाता था।

मोहरा मोराडू और सिरकप क्यों हैं महत्वपूर्ण?

मोहरा मोराडू तक्षशिला घाटी में स्थित एक प्रमुख बौद्ध मठ परिसर है, जहां स्तूप, विहार और अन्य धार्मिक संरचनाओं के अवशेष मिले हैं। वहीं सिरकप एक प्राचीन नियोजित नगर है, जिसका विकास पहले इंडो-यूनानी और बाद में कुषाण शासकों के काल में हुआ था। यह नगर अपनी सुव्यवस्थित सड़क योजना, पत्थर की दीवारों और हेलेनिस्टिक स्थापत्य प्रभावों के लिए प्रसिद्ध है। इन दोनों स्थलों का अध्ययन प्राचीन शहरी नियोजन, बौद्ध वास्तुकला और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

यूनेस्को के संरक्षण मानक

विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण के लिए यूनेस्को न्यूनतम हस्तक्षेप, मूल संरचना को सुरक्षित रखने तथा मूल सामग्री के अनुरूप निर्माण सामग्री के उपयोग पर जोर देता है। प्राचीन पत्थर या मिट्टी की संरचनाओं के स्थान पर सीमेंट, आधुनिक चिनाई या ऊंचाई में परिवर्तन जैसे कार्य कई संरक्षण दिशानिर्देशों के अनुसार अनुचित माने जाते हैं, क्योंकि इससे ऐतिहासिक प्रामाणिकता प्रभावित हो सकती है।

मांगे गए दस्तावेज और तकनीकी निरीक्षण

यूनेस्को ने पाकिस्तान से संरक्षण कार्यों से संबंधित हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट (Heritage Impact Assessment) रिपोर्ट, पुनर्स्थापन से पहले और बाद की तस्वीरें तथा अन्य तकनीकी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। जून 2026 में यूनेस्को, पाकिस्तान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग तथा राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति प्रभाग के प्रतिनिधियों ने तक्षशिला संग्रहालय का संयुक्त तकनीकी निरीक्षण भी किया था, जिसके बाद यह कार्रवाई सामने आई।

पाकिस्तान की विश्व धरोहर संपदा

पाकिस्तान के पास वर्तमान में 6 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें तक्षशिला, मोहनजोदड़ो तथा लाहौर का किला और शालीमार गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, देश ने भविष्य में नामांकन के लिए कई अन्य विरासत स्थलों को अपनी अस्थायी सूची (टेंटेटिव लिस्ट) में भी शामिल किया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूनेस्को के 1972 विश्व धरोहर सम्मेलन के तहत किसी भी संकटग्रस्त धरोहर स्थल को विश्व धरोहर संकट सूची (List of World Heritage in Danger) में शामिल किया जा सकता है।
  • तक्षशिला दक्षिण एशिया के सबसे प्रारंभिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों में से एक है।
  • मोहरा मोराडू तक्षशिला घाटी के महत्वपूर्ण बौद्ध मठों के अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है।
  • सिरकप अपने नियोजित प्राचीन नगर विन्यास और हेलेनिस्टिक स्थापत्य प्रभावों के लिए जाना जाता है।

तक्षशिला विश्व धरोहर परिसर से जुड़ा यह मामला सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय मानकों के महत्व को रेखांकित करता है। प्राचीन स्मारकों की मौलिकता और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखना विश्व धरोहर संरक्षण का मूल उद्देश्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन अमूल्य धरोहरों का अध्ययन और संरक्षण कर सकें।

Originally written on July 3, 2026 and last modified on July 3, 2026.

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