प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों से किया संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जून 2026 को नई दिल्ली में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2024 बैच के 183 प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद किया। ये अधिकारी उस समय विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव (असिस्टेंट सेक्रेटरी) के रूप में कार्यरत थे। इस अवसर पर प्रशासनिक नेतृत्व, सुशासन, डेटा-आधारित नीति निर्माण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर विशेष चर्चा की गई। यह संवाद युवा अधिकारियों को राष्ट्र निर्माण की दिशा में उनकी भूमिका समझाने और भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर माना गया।
भारतीय प्रशासनिक सेवा का महत्व
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारत की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवाओं में से एक है। यह संविधान के अंतर्गत स्थापित तीन अखिल भारतीय सेवाओं में शामिल है। अन्य दो सेवाएं भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS) हैं। आईएएस अधिकारी केंद्र और राज्य सरकारों के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। आईएएस अधिकारियों की भर्ती संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से की जाती है। चयन के बाद अधिकारियों को विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे प्रशासनिक कार्यों, नीति निर्माण और जनसेवा की जटिलताओं को समझ सकें।
सहायक सचिव प्रशिक्षण की भूमिका
प्रशिक्षण के दौरान आईएएस परिवीक्षाधीन अधिकारियों को केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में नियुक्त किया जाता है। इस अवधि का उद्देश्य उन्हें सचिवालय प्रणाली और सरकारी कार्यप्रणाली से परिचित कराना होता है। इस प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी फाइलों की प्रक्रिया, विभागों के बीच समन्वय, नीतिगत निर्णयों की तैयारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि केंद्र सरकार की योजनाएं किस प्रकार तैयार और लागू की जाती हैं।
डेटा-आधारित शासन पर जोर
संवाद के दौरान डेटा-आधारित शासन की अवधारणा भी प्रमुख विषय रही। आधुनिक प्रशासन में डेटा का उपयोग योजनाओं की निगरानी, सेवा वितरण की समीक्षा और नीतियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है। डेटा-आधारित शासन के माध्यम से सरकार विभिन्न योजनाओं की प्रगति को माप सकती है, कमियों की पहचान कर सकती है और आवश्यक सुधार लागू कर सकती है। यह प्रणाली पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम-आधारित प्रशासन को मजबूत बनाती है।
समग्र सरकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता
आज के समय में कई चुनौतियां ऐसी हैं जिनका समाधान केवल एक मंत्रालय या विभाग के माध्यम से संभव नहीं है। इसी कारण “होल-ऑफ-गवर्नमेंट” यानी समग्र सरकारी दृष्टिकोण को महत्व दिया जा रहा है। इस पद्धति के तहत विभिन्न मंत्रालय, विभाग और एजेंसियां एक साझा लक्ष्य के लिए मिलकर कार्य करती हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण और डिजिटल प्रशासन जैसे क्षेत्रों में यह दृष्टिकोण विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। इससे नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
विकसित भारत 2047 का विजन
विकसित भारत 2047 भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर से जुड़ा एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय विकास लक्ष्य है। इसका उद्देश्य भारत को आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक रूप से विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। इस विजन के अंतर्गत प्रशासनिक सुधार, बेहतर सेवा वितरण, नवाचार, डिजिटल शासन और परिणाम-आधारित नीति निर्माण को विशेष महत्व दिया गया है। युवा आईएएस अधिकारियों को इस लक्ष्य की प्राप्ति में प्रमुख भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFoS) मिलकर भारत की तीन अखिल भारतीय सेवाएं बनाती हैं।
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है, जिसके माध्यम से आईएएस अधिकारियों की भर्ती होती है।
- विकसित भारत 2047 भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी से जुड़ा राष्ट्रीय विकास विजन है।
- वर्तमान आईएएस बैच में महिला अधिकारियों की भागीदारी 40 प्रतिशत से अधिक बताई गई है।
प्रधानमंत्री और युवा आईएएस अधिकारियों के बीच हुआ यह संवाद प्रशासनिक नेतृत्व और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। डेटा-आधारित निर्णय, समन्वित प्रशासन और विकसित भारत 2047 जैसे लक्ष्यों पर बल देकर भविष्य के अधिकारियों को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया गया। आने वाले वर्षों में यही अधिकारी देश की नीतियों को लागू करने और विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।