पूर्वोत्तर रेलवे की ‘अवध महाशक्ति’ से माल ढुलाई में नया रिकॉर्ड
पूर्वोत्तर रेलवे की लखनऊ मंडल ने 20 अगस्त 2026 को ‘अवध महाशक्ति’ नाम से एक ऐसी मालगाड़ी चलाई, जिसे तीन अलग-अलग मालगाड़ियों को जोड़कर तैयार किया गया था। 129 वैगनों और तीन भारी-भरकम इंजनों वाली यह ट्रेन मंडल के इतिहास की सबसे लंबी मालगाड़ी बनी। यह संचालन भारतीय रेल की माल ढुलाई क्षमता, समन्वय और भारी-ढुलाई तकनीक का एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।
गोंडा से शुरू हुआ विशेष संचालन
यह मालगाड़ी गोंडा जंक्शन से दोपहर 1:50 बजे रवाना हुई और सीतापुर के रास्ते मुरादाबाद मंडल की ओर बढ़ी। ट्रेन को गोंडा के आरओएच डिपो में जोड़ा गया, जहां रोलिंग स्टॉक की जांच, मरम्मत और सर्विसिंग की जाती है। आरओएच यानी Routine Overhaul रेलवे कोच और वैगनों के रखरखाव की नियमित प्रक्रिया है, जो सुरक्षित और निर्बाध संचालन के लिए जरूरी मानी जाती है।
तीन ट्रेनों को एक साथ जोड़ने का फायदा
भारतीय रेल में कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक, पेट्रोलियम उत्पाद और कंटेनर जैसी वस्तुओं की ढुलाई बड़े पैमाने पर मालगाड़ियों से होती है। इस तरह की भारी-ढुलाई व्यवस्था में एक ही पथ पर अधिक माल ले जाने के लिए कई इंजनों और लंबे रेक का उपयोग किया जाता है। ‘अवध महाशक्ति’ के मामले में तीन ट्रेनों को एक साथ जोड़ने से ट्रैक क्षमता की बचत हुई, ईंधन की खपत कम हुई और माल के गंतव्य तक पहुंचने का समय भी घटा।
रेलवे संचालन में समन्वय की अहम भूमिका
इस विशेष संचालन में मंडल स्तर पर मजबूत समन्वय देखने को मिला। लखनऊ मंडल के मंडल रेल प्रबंधक गौरव अग्रवाल की निगरानी में यह संचालन हुआ, जबकि वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक डॉ. शिल्पी कन्नौजिया ने ट्रेन मूवमेंट और ट्रैफिक नियंत्रण से जुड़ी समन्वय व्यवस्था संभाली। रेलवे के सार्वजनिक संचार में महेश गुप्ता ने जानकारी साझा की। ऐसे अभियानों में समयबद्धता, सुरक्षा और सटीक नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय रेल को जोनों और मंडलों में बांटा गया है; प्रत्येक जोन के भीतर कई प्रशासनिक मंडल काम करते हैं।
- पूर्वोत्तर रेलवे भारतीय रेल के प्रमुख जोनों में से एक है और लखनऊ मंडल इसके प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा है।
- आरओएच का पूरा नाम Routine Overhaul है, जो कोच और वैगनों के रखरखाव की प्रक्रिया है।
- मालगाड़ियां भारतीय रेल की आय का महत्वपूर्ण स्रोत हैं और भारी मात्रा में वस्तुओं की ढुलाई करती हैं।
‘अवध महाशक्ति’ जैसी पहलें दिखाती हैं कि भारतीय रेल अब केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने वाला एक बड़ा नेटवर्क बन चुकी है। लंबी और संयुक्त मालगाड़ियों का उपयोग भविष्य में रेल ढुलाई को और अधिक प्रभावी बना सकता है।