पूर्वी तट के रेल नेटवर्क को 9,450 करोड़ की नई रफ्तार

पूर्वी तट के रेल नेटवर्क को 9,450 करोड़ की नई रफ्तार

केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे के चार बहु-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देकर पूर्वी और दक्षिणी भारत के रेल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 19 अगस्त 2026 को कुल 9,450 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी। इनसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के आठ जिलों में रेल क्षमता बढ़ेगी और करीब 6,448 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।

किन रूटों पर होगा विस्तार

स्वीकृत परियोजनाओं के तहत लगभग 410 किलोमीटर नई रेल क्षमता जोड़ी जाएगी। सबसे बड़ी परियोजना 173 किलोमीटर लंबी खड़गपुर-भद्रक (रणिताल) चौथी लाइन है, जिसकी लागत 3,352 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा ओडिशा में 75 किलोमीटर लंबी भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन के लिए 1,583 करोड़ रुपये और 72 किलोमीटर लंबी कटक-परादीप (बदाबंधा) तीसरी व चौथी लाइन के लिए 2,286 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

चौथी परियोजना 90 किलोमीटर लंबी गुम्मिडिपुंडी-गुडूर तीसरी व चौथी लाइन है, जो आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से होकर गुजरेगी। इस पर 2,229 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

क्यों अहम है यह फैसला

इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा असर हावड़ा-चेन्नई उच्च-घनत्व ट्रंक रूट पर पड़ेगा। यह पूर्वी तट का एक प्रमुख रेल गलियारा है, जहां यात्री और मालगाड़ी दोनों का भारी दबाव रहता है। मल्टी-ट्रैकिंग से एक ही कॉरिडोर पर ट्रेनों की आवाजाही अलग-अलग लाइनों में बंट जाती है, जिससे भीड़ कम होती है, समयपालन बेहतर होता है और लाइन क्षमता बढ़ती है।

रेलवे के लिए यह कदम खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस रूट पर कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट और खाद्यान्न जैसी वस्तुओं की ढुलाई बड़ी मात्रा में होती है। नई लाइनों से मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी और औद्योगिक तथा बंदरगाह-आधारित क्षेत्रों को बेहतर सपोर्ट मिलेगा।

परियोजनाओं से क्या लाभ मिलेगा

रेल मंत्रालय के अनुसार, इन चारों परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है। पूरा होने के बाद ये लाइनें सालाना लगभग 76 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता उपलब्ध करा सकती हैं। इससे न केवल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा, बल्कि पूर्वी भारत के औद्योगिक, खनन और कृषि क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत रेल नेटवर्कों में से एक है। ऐसे में भीड़भाड़ वाले मार्गों पर तीसरी और चौथी लाइन जोड़ना भविष्य की मांग को देखते हुए एक रणनीतिक निवेश माना जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
  • मल्टी-ट्रैकिंग का अर्थ है मौजूदा रेल कॉरिडोर पर अतिरिक्त लाइनें जोड़ना।
  • हावड़ा-चेन्नई कॉरिडोर पूर्वी तट का एक प्रमुख और व्यस्त रेल मार्ग है।
  • इन चार परियोजनाओं से लगभग 410 किलोमीटर नई रेल क्षमता और 76 मिलियन टन अतिरिक्त वार्षिक माल ढुलाई क्षमता जुड़ने की संभावना है।

कुल मिलाकर, यह मंजूरी सिर्फ रेल लाइनें बढ़ाने का फैसला नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत की औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला, बंदरगाह संपर्क और यात्री आवागमन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

Originally written on August 19, 2026 and last modified on August 19, 2026.

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