पी. कुमारन बने ब्रिटेन में भारत के नए उच्चायुक्त
भारत के वरिष्ठ राजनयिक पी. कुमारन ने 13 मई 2026 को यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त-नामित के रूप में कार्यभार संभाला और 14 मई 2026 को लंदन में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। उन्होंने डिप्लोमैटिक कॉर्प्स के वाइस-मार्शल स्कॉट फर्सेडन-वुड को अपने प्रत्यय पत्र प्रस्तुत किए। उनका पूर्ण कार्यकाल तब शुरू होगा जब वे ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय को औपचारिक रूप से अपने प्रत्यय पत्र सौंपेंगे। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच राजनयिक संबंधों के लिहाज से यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग भारत की यूरोप में सबसे पुरानी और प्रमुख कूटनीतिक मिशनों में से एक है।
भारतीय विदेश सेवा में लंबा अनुभव
पी. कुमारन वर्ष 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) के रूप में भी कार्य किया है। इस पद पर रहते हुए वे भारत की पूर्वी देशों से जुड़ी विदेश नीति और कूटनीतिक संबंधों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। भारतीय विदेश सेवा देश की प्रमुख कूटनीतिक सेवा है, जिसकी स्थापना वर्ष 1946 में की गई थी। यह सेवा विदेश मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और विदेशों में भारत के राजनयिक प्रतिनिधित्व का संचालन करती है।
कई देशों में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी
पी. कुमारन का कूटनीतिक करियर काफी व्यापक रहा है। वे 2016 से 2020 तक कतर में भारत के राजदूत रहे। इसके बाद उन्होंने 2020 से 2023 तक सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएं दीं। कॉमनवेल्थ देशों के बीच राजनयिक मिशन के प्रमुख को “उच्चायुक्त” कहा जाता है, जबकि गैर-कॉमनवेल्थ देशों में मिशन प्रमुख को “राजदूत” कहा जाता है। चूंकि भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस के सदस्य हैं, इसलिए दोनों देशों में दूतावास के स्थान पर उच्चायोग कार्य करते हैं।
भारत-ब्रिटेन संबंधों में नई भूमिका
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, शिक्षा, रक्षा और तकनीक के क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ रहा है। ऐसे समय में पी. कुमारन की नियुक्ति दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटेन में भारतीय समुदाय की बड़ी उपस्थिति और दोनों देशों के रणनीतिक हितों को देखते हुए यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया है।
महात्मा गांधी और डॉ. आंबेडकर को दी श्रद्धांजलि
कार्यभार संभालने के बाद पी. कुमारन ने लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर और पार्लियामेंट स्क्वायर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके अलावा उन्होंने लंदन स्थित आंबेडकर हाउस में बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को भी श्रद्धांजलि दी। टैविस्टॉक स्क्वायर और पार्लियामेंट स्क्वायर लंदन के प्रमुख सार्वजनिक स्थल हैं, जो राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय विदेश सेवा (IFS) की स्थापना वर्ष 1946 में हुई थी।
- भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों कॉमनवेल्थ देशों के सदस्य हैं, इसलिए दोनों देशों में उच्चायोग स्थापित हैं।
- किंग चार्ल्स तृतीय वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम के राष्ट्राध्यक्ष हैं।
- लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग यूरोप में भारत के सबसे पुराने कूटनीतिक मिशनों में से एक है।
पी. कुमारन की नियुक्ति भारत-ब्रिटेन संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। उनके लंबे कूटनीतिक अनुभव और विभिन्न देशों में सेवा के आधार पर उम्मीद की जा रही है कि वे दोनों देशों के बीच सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाएंगे।