भारत-ईरान वार्ता में समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया पर हुई चर्चा

भारत-ईरान वार्ता में समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया पर हुई चर्चा

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 15 मई 2026 को नई दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान आयोजित की गई। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति, भारत-ईरान संबंधों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेष रूप से तेल और एलएनजी व्यापार के लिए उपयोग होने वाले समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर विचार-विमर्श किया गया। भारत और ईरान के संबंध लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा मामलों में लगातार संवाद होता रहा है। नई दिल्ली और तेहरान में दोनों देशों के दूतावास मौजूद हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर

बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर क्षेत्र की सुरक्षा पर विशेष चर्चा हुई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और एलएनजी इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसी तरह लाल सागर को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के जरिए हिंद महासागर से जोड़ा जाता है। यह क्षेत्र भी वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है।

ब्रिक्स मंच पर बढ़ता सहयोग

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक 2026 में भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस मंच पर सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक राजनीति, आर्थिक सहयोग और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की। ब्रिक्स संगठन की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी, जबकि 2024 में इसका विस्तार कर नए सदस्य देशों को भी शामिल किया गया, जिनमें ईरान भी शामिल है। इस बैठक के दौरान भारत ने कई देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। इससे भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका और बहुपक्षीय मंचों पर उसकी सक्रियता भी स्पष्ट होती है।

चाबहार पोर्ट और क्षेत्रीय संपर्क

भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट परियोजना भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रही है। यह परियोजना भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। चाबहार बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का प्रमुख हिस्सा है और इससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 14 मई 2026 को नई दिल्ली में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की थी। अराघची 12 से 14 मई तक भारत दौरे पर रहे और ब्रिक्स मंत्रीस्तरीय कार्यक्रमों में शामिल हुए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
  • बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य जिबूती और यमन के बीच स्थित है।
  • ब्रिक्स समूह की स्थापना उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
  • चाबहार पोर्ट परियोजना भारत, ईरान और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करती है।

भारत और ईरान के बीच यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर दोनों देशों का सहयोग आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण माना जाएगा।

Originally written on May 15, 2026 and last modified on May 15, 2026.

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