त्रिपुरा ने विनियमन सुधार अभियान में हासिल की राष्ट्रीय उपलब्धि

त्रिपुरा ने विनियमन सुधार अभियान में हासिल की राष्ट्रीय उपलब्धि

त्रिपुरा ने 14-15 मई 2026 को भारत में एक नई प्रशासनिक उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय “कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डीरिग्युलेशन” पहल के तहत डीरिग्युलेशन फेज-II के सभी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पूरा करने वाला पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया। भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय के नेतृत्व में चल रही इस पहल का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनुमोदन प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करना और अनावश्यक नियमों व प्रक्रियात्मक बोझ को कम करना है। इस उपलब्धि ने त्रिपुरा को निवेश और औद्योगिक सुधारों के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की सूची में ला खड़ा किया है।

कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डीरिग्युलेशन पहल क्या है

कम्प्लायंस रिडक्शन एंड डीरिग्युलेशन पहल एक राष्ट्रीय सुधार कार्यक्रम है, जिसका मुख्य उद्देश्य उद्योगों, व्यापारिक संस्थाओं और नागरिकों पर पड़ने वाले नियामकीय बोझ को कम करना है। इस कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई थी। इसमें राजस्व, शहरी विकास, उद्योग, श्रम, पर्यावरण, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल गवर्नेंस जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया। इस पहल के माध्यम से राज्यों को प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, ऑनलाइन और समयबद्ध बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि निवेश का माहौल बेहतर हो सके।

त्रिपुरा द्वारा पूरे किए गए प्रमुख सुधार

त्रिपुरा ने कुल 51 प्राथमिकता सुधार क्षेत्रों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इनमें फेज-I के 23 और फेज-II के 28 सुधार क्षेत्र शामिल हैं। राज्य पहले ही फेज-I के सभी 23 प्राथमिकता क्षेत्रों को लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका था। राज्य सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन व्यवस्था लागू की है। इसके अलावा व्यवसायिक मंजूरियों के लिए सिंगल विंडो अप्रूवल एजेंसी को मजबूत बनाया गया है। कई प्रकार के अनापत्ति प्रमाणपत्रों (NOC) को सरल किया गया और कम जोखिम वाले अनुमोदनों को पूरी तरह स्वचालित बनाया गया। कुछ श्रेणी के उद्योग अब केवल स्व-घोषणा के आधार पर संचालन शुरू कर सकते हैं। साथ ही उन्हें तीन वर्षों तक निरीक्षण में छूट देने जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। इन कदमों से उद्योगों को तेज़ी से काम शुरू करने में मदद मिलेगी।

निवेश और औद्योगिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

त्रिपुरा के उद्योग एवं वाणिज्य सचिव किरण गित्ते के अनुसार ये सुधार डिजिटल अनुमोदन प्रणाली और कम कम्प्लायंस बोझ से सीधे जुड़े हुए हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इन सुधारों से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। वर्ष 2022 से अब तक त्रिपुरा ने 35,140 करोड़ रुपये मूल्य के 394 एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से 5,352 करोड़ रुपये की परियोजनाएं धरातल पर शुरू भी हो चुकी हैं। राज्य सरकार जुलाई 2026 में एक मेगा बिजनेस कॉन्क्लेव आयोजित करने की योजना बना रही है, जिसमें लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • त्रिपुरा जनवरी 2026 में डीरिग्युलेशन 1.0 में ओडिशा और उत्तर प्रदेश के साथ संयुक्त रूप से देश में प्रथम स्थान पर रहा था।
  • डीरिग्युलेशन फेज-II की शुरुआत जनवरी 2026 में की गई थी।
  • सिंगल विंडो क्लियरेंस प्रणाली उद्योगों को एक ही मंच पर विभिन्न सरकारी मंजूरियां उपलब्ध कराती है।
  • भारत में औद्योगिक सुधारों के तहत सेल्फ-सर्टिफिकेशन और निरीक्षण छूट जैसी व्यवस्थाएं निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अपनाई जाती हैं।

त्रिपुरा की यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य को निवेश, उद्योग और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में नई पहचान भी दिला रही है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहे तो आने वाले वर्षों में त्रिपुरा पूर्वोत्तर भारत का एक प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र बन सकता है।

Originally written on May 15, 2026 and last modified on May 15, 2026.

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