राष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजाति दिवस 2026 आज, वन्यजीव संरक्षण पर बढ़ा जोर
राष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजाति दिवस 2026 का आयोजन 15 मई 2026 को किया जा रहा है। यह दिवस हर वर्ष मई महीने के तीसरे शुक्रवार को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इस वैश्विक संरक्षण दिवस का 21वां वार्षिक आयोजन हो रहा है, जिसका उद्देश्य संकटग्रस्त और विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। यह दिवस दुनिया भर में जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और वन्यजीव सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विभिन्न देशों में स्कूलों, संस्थानों और पर्यावरण संगठनों द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
क्या है राष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजाति दिवस
राष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजाति दिवस की शुरुआत अमेरिका में एक वार्षिक अभियान के रूप में हुई थी। बाद में इसे कई देशों में संरक्षण शिक्षा और वन्यजीव जागरूकता कार्यक्रमों के लिए अपनाया गया। वर्ष 2026 की थीम “Celebrating America’s Wildlife Comeback Stories. Championing the Endangered Species Act” रखी गई है। इसका उद्देश्य उन प्रजातियों की सफलता की कहानियों को सामने लाना है जिन्हें कानूनी संरक्षण और संरक्षण अभियानों के जरिए विलुप्त होने से बचाया गया।
एंडेंजर्ड स्पीशीज एक्ट क्या है
एंडेंजर्ड स्पीशीज एक्ट (ESA) अमेरिका का एक संघीय कानून है, जिसे वर्ष 1973 में लागू किया गया था। यह कानून संकटग्रस्त और खतरे में पड़ी प्रजातियों तथा उनके महत्वपूर्ण आवासों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। बाल्ड ईगल और अमेरिकन एलीगेटर जैसी प्रजातियां ESA के तहत सफल संरक्षण के प्रमुख उदाहरण मानी जाती हैं। इस कानून के माध्यम से कई वन्यजीव प्रजातियों की संख्या में सुधार हुआ है।
भारत में भी हो रहे संरक्षण कार्यक्रम
भारत में भी इस दिवस को जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के लिए उपयोग किया जा रहा है। स्कूल, गैर-सरकारी संगठन और विभिन्न संस्थान ईको-क्लब गतिविधियां, प्रकृति भ्रमण, फिल्म प्रदर्शन, चित्रकला प्रतियोगिताएं और जागरूकता अभियान आयोजित कर रहे हैं। इसके अलावा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस शिखर सम्मेलन 2026 से पहले देशभर में “बिग कैट कंजर्वेशन इवेंट्स 2026” का आयोजन कर रहा है। इन कार्यक्रमों में बाघ, एशियाई शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता जैसी बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भारत में बाघ संरक्षण की स्थिति
भारत दुनिया के 70 प्रतिशत से अधिक जंगली बाघों का घर माना जाता है। देश में बाघ संरक्षण के लिए वर्ष 1973 में “प्रोजेक्ट टाइगर” शुरू किया गया था। इसके तहत बाघों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और संरक्षण पर विशेष कार्य किया जाता है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्य करता है। हाल ही में 12 मई 2026 को हैदराबाद के नेहरू प्राणी उद्यान में “Shared Stripes – Shared Future” नामक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें मलेशिया, रूस, श्रीलंका, थाईलैंड और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजाति दिवस हर वर्ष मई के तीसरे शुक्रवार को मनाया जाता है।
- एंडेंजर्ड स्पीशीज एक्ट (ESA) अमेरिका में वर्ष 1973 में लागू किया गया था।
- बाल्ड ईगल और अमेरिकन एलीगेटर ESA के तहत संरक्षित प्रमुख प्रजातियों में शामिल हैं।
- भारत में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत वर्ष 1973 में की गई थी।
राष्ट्रीय संकटग्रस्त प्रजाति दिवस पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के महत्व को याद दिलाने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैव विविधता की रक्षा केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन और पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी बेहद आवश्यक है।