लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में शुरू हुई 14,000 फीट से अधिक ऊंची सिंचाई नहर
लद्दाख के दुर्गम चांगथांग क्षेत्र में 14 मई 2026 को 2.10 किलोमीटर लंबी माहे टोकपो-राल्धो सिंचाई नहर का उद्घाटन किया गया। यह नहर न्योमा क्षेत्र में 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है और इसे याया झील से जल आपूर्ति मिलती है। इस परियोजना को लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कृषि और जल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस नहर के निर्माण से माहे क्षेत्र की लगभग 100 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। अत्यधिक ठंडे और शुष्क वातावरण वाले इस क्षेत्र में खेती के लिए पानी की उपलब्धता लंबे समय से चुनौती रही है।
चांगथांग क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताएं
चांगथांग पूर्वी लद्दाख का एक उच्च हिमालयी पठारी क्षेत्र है, जो अपने ठंडे रेगिस्तानी वातावरण और पशुपालक समुदायों के लिए जाना जाता है। न्योमा इस क्षेत्र का एक दूरस्थ प्रशासनिक इलाका है, जहां अत्यधिक ठंड, कम वनस्पति और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां कृषि गतिविधियों को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे क्षेत्रों में छोटे सिंचाई नहरों, ग्लेशियर से निकलने वाली धाराओं और जल भंडारण प्रणालियों का उपयोग कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
2022-23 में शुरू हुई थी परियोजना
माहे टोकपो-राल्धो नहर परियोजना की शुरुआत वर्ष 2022-23 में की गई थी। मार्च 2026 तक नहर का केवल 1,250 मीटर हिस्सा ही तैयार हो पाया था। इसके बाद उपराज्यपाल द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद शेष 850 मीटर निर्माण कार्य लगभग दो महीनों में पूरा किया गया। इस नहर का उद्घाटन विनय कुमार सक्सेना ने अपने चांगथांग जिले के पहले दौरे के दौरान किया। हाल ही में चांगथांग को एक नए जिले के रूप में विकसित किया गया है, जिससे क्षेत्रीय प्रशासन और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मिट्टी संरक्षण, जल सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन से भी जोड़ा गया है। नहर के किनारे 14 मई 2026 को 15,000 पौधों का वृक्षारोपण अभियान भी शुरू किया गया। सरकार का उद्देश्य इस परियोजना के माध्यम से कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में हरित आवरण और पर्यावरणीय स्थिरता को मजबूत करना है।
लद्दाख में बढ़ रही विकास परियोजनाएं
लद्दाख को 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद से क्षेत्र में सड़क, जल, कृषि और बुनियादी ढांचा विकास से जुड़ी कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग स्थानीय समुदायों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है। यह नहर परियोजना भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लद्दाख 31 अक्टूबर 2019 को केंद्र शासित प्रदेश बना था।
- चांगथांग क्षेत्र अपने उच्च हिमालयी ठंडे रेगिस्तानी भूभाग के लिए प्रसिद्ध है।
- याया झील इस सिंचाई नहर के लिए जल स्रोत के रूप में कार्य करती है।
- लद्दाख में कृषि के लिए छोटी नहरें, ग्लेशियर धाराएं और जल भंडारण प्रणालियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
माहे टोकपो-राल्धो सिंचाई नहर परियोजना लद्दाख के दुर्गम क्षेत्रों में जल प्रबंधन और कृषि विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है। इससे स्थानीय किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।