पश्चिम बंगाल में डिजिटल जनगणना की शुरुआत, 16वीं जनगणना बनेगी पूरी तरह ऑनलाइन

पश्चिम बंगाल में डिजिटल जनगणना की शुरुआत, 16वीं जनगणना बनेगी पूरी तरह ऑनलाइन

भारत की 16वीं जनगणना के तहत पश्चिम बंगाल में 1 अगस्त 2026 से डिजिटल स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में टली यह जनगणना अब 2026 और 2027 में दो चरणों में कराई जा रही है। इस बार जनगणना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें लोग मोबाइल ऐप या आधिकारिक पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।

डिजिटल स्व-गणना से बदलेगा जनगणना का तरीका

पश्चिम बंगाल में स्व-गणना की यह सुविधा 1 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रहेगी। पोर्टल 16 भाषाओं में डेटा एंट्री की सुविधा दे रहा है, ताकि अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले परिवार आसानी से अपनी जानकारी भर सकें। यह कदम जनगणना प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।जनगणना के इस चरण में परिवार स्तर की जानकारी दर्ज की जाएगी, जिसमें घर, सदस्यों और आवास से जुड़ी बुनियादी जानकारियां शामिल होंगी। इसके बाद फील्ड स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया होगी, ताकि दर्ज किए गए विवरणों की जांच की जा सके।

घर-गणना और फील्ड वेरिफिकेशन का अगला चरण

पश्चिम बंगाल में हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का चरण 16 अगस्त से 14 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी की पुष्टि करेंगे और अतिरिक्त जनगणना विवरण एकत्र करेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर यह चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है।जनगणना भारत में केवल जनसंख्या गिनने का काम नहीं है, बल्कि इससे आवासीय स्थिति, सामाजिक-आर्थिक ढांचे और प्रशासनिक योजना से जुड़ा अहम डेटा भी मिलता है। इसी आधार पर सरकारें कल्याणकारी योजनाओं, संसाधन आवंटन और नीति-निर्माण की दिशा तय करती हैं।

क्यों खास है 2026-27 की जनगणना

भारत की जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत होता है। इसे गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त कराते हैं। इस बार की जनगणना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2027 की जनगणना में जातिगत गणना भी शामिल होगी, जो 1931 के बाद पहली बार होगी।पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम ने भी डिजिटल जनगणना जागरूकता के लिए 700 सरकारी स्कूलों और 300 निजी स्कूलों की भागीदारी की योजना बनाई है। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन इस प्रक्रिया को व्यापक जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत की जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत कराई जाती है।
  • जनगणना का संचालन गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त करते हैं।
  • भारत की 16वीं जनगणना पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना है।
  • 2027 की जनगणना में जातिगत गणना 1931 के बाद पहली बार शामिल होगी।

पश्चिम बंगाल में शुरू हुई यह प्रक्रिया देशभर में जनगणना के डिजिटल और व्यवस्थित मॉडल की दिशा में एक अहम कदम है। आने वाले महीनों में इसका असर प्रशासनिक तैयारी, डेटा संग्रह और नीति-निर्माण पर साफ दिखाई देगा।

Originally written on August 1, 2026 and last modified on August 1, 2026.

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