नेपाल में भारत के नए राजदूत होंगे सुधाकर दलेला
भारत ने वरिष्ठ राजनयिक सुधाकर दलेला को नेपाल में अपना अगला राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को यह नियुक्ति घोषित की। हालांकि, दलेला के कार्यभार संभालने से पहले नेपाल सरकार की औपचारिक सहमति मिलना बाकी है। वह सितंबर 2026 में अपना कार्यकाल पूरा कर चुके नवीन श्रीवास्तव का स्थान लेंगे।
नेपाल मामलों का अनुभव रखने वाले राजनयिक
1993 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी दलेला को दक्षिण एशिया के पड़ोसी देशों से जुड़े मामलों का अनुभव है। वह विदेश मंत्रालय में 1 सितंबर 2025 से आर्थिक संबंध सचिव के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले, 2022 से 2025 तक उन्होंने भूटान में भारत के राजदूत की जिम्मेदारी निभाई।
दलेला विदेश मंत्रालय में उत्तर प्रभाग के निदेशक और बाद में संयुक्त सचिव भी रह चुके हैं। उन्होंने निदेशक (उत्तर) के रूप में 2006 से 2007 तक और संयुक्त सचिव (उत्तर) के रूप में 2016 से 2019 तक काम किया। इन पदों पर उनके कार्यक्षेत्र में नेपाल और भूटान से जुड़े क्षेत्रीय विषय शामिल थे। वह ब्रिक्स, इब्सा और आई2यू2 समूहों में भारत के शेरपा के रूप में भी भूमिका निभा चुके हैं।
राजदूत नियुक्ति में नेपाल की सहमति क्यों जरूरी
भारत सरकार ने दलेला के नाम को 6 अक्टूबर 2026 को नेपाल के विदेश मंत्रालय के पास औपचारिक स्वीकृति के लिए भेजा था। इस सहमति को राजनयिक भाषा में ‘एग्रीमा’ कहा जाता है। किसी देश में प्रस्तावित राजदूत को भेजने से पहले मेजबान देश की मंजूरी प्राप्त करना सामान्य राजनयिक प्रक्रिया है। इसलिए नियुक्ति की घोषणा के बावजूद दलेला की तैनाती नेपाल की स्वीकृति पर निर्भर है।
राजदूत किसी दूसरे देश में अपने राष्ट्र का सर्वोच्च स्तर का आधिकारिक प्रतिनिधि होता है। राजनयिक मिशनों के कामकाज, अधिकारों और विशेषाधिकारों से जुड़े कई नियम 1961 में अपनाए गए वियना अभिसमय में निर्धारित हैं। दलेला का नेपाल से जुड़े मामलों का अनुभव ऐसे समय में उपयोगी हो सकता है, जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच नियमित राजनयिक संवाद और सहयोग महत्वपूर्ण है।
भारत-नेपाल संबंधों का ऐतिहासिक आधार
भारत और नेपाल ने 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। दोनों देशों के बीच स्थलीय सीमा है और दोनों की राजधानियों में एक-दूसरे के राजनयिक मिशन मौजूद हैं। द्विपक्षीय संबंधों का एक प्रमुख आधार 31 जुलाई 1950 को हस्ताक्षरित भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि है। दलेला का पिछला राजनयिक कार्यक्षेत्र और भूटान में राजदूत के रूप में अनुभव इस क्षेत्र की कूटनीति से उनकी परिचितता दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय विदेश सेवा, विदेश मंत्रालय के अधीन भारत की राजनयिक सेवा है।
- राजनयिक संबंधों पर वियना अभिसमय 1961 में अपनाया गया था।
- भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि पर 31 जुलाई 1950 को हस्ताक्षर हुए थे।
- सुधाकर दलेला 2022 से 2025 तक भूटान में भारत के राजदूत रहे।
दलेला की नियुक्ति नेपाल की औपचारिक सहमति के बाद प्रभावी होगी। उनके क्षेत्रीय अनुभव से भारत-नेपाल राजनयिक संवाद को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।