नीति आयोग द्वारा टायर पाइरोलिसिस उत्पादों के लिए नए मानक प्रस्ताव

नीति आयोग द्वारा टायर पाइरोलिसिस उत्पादों के लिए नए मानक प्रस्ताव

भारत में बढ़ते कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की जरूरतों के बीच नीति आयोग ने टायर पाइरोलिसिस ऑयल और रिकवर्ड कार्बन ब्लैक के लिए नए मानक प्रस्तावित किए हैं। ये दोनों उत्पाद पुराने और अनुपयोगी टायरों के बिना ऑक्सीजन के उच्च तापमान पर विघटन से प्राप्त होते हैं। यह पहल न केवल अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाएगी, बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा देगी।

टायर पाइरोलिसिस प्रक्रिया क्या है

पाइरोलिसिस एक थर्मोकेमिकल प्रक्रिया है, जिसमें ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में उच्च तापमान पर कार्बनिक पदार्थों का विघटन किया जाता है। जब इस प्रक्रिया का उपयोग पुराने टायरों पर किया जाता है, तो इससे मुख्य रूप से चार प्रकार के उत्पाद प्राप्त होते हैं—टायर पाइरोलिसिस ऑयल, गैस (पाइरो-गैस), चार (कार्बन अवशेष) और स्टील वायर। यह प्रक्रिया अपशिष्ट टायरों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि इससे कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है। साथ ही, यह पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में भी सहायक है।

टायर पाइरोलिसिस ऑयल का उपयोग

टायर पाइरोलिसिस ऑयल एक तरल हाइड्रोकार्बन उत्पाद है, जिसे उचित प्रसंस्करण और गुणवत्ता नियंत्रण के बाद औद्योगिक ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इसकी संरचना कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि उपयोग किए गए टायर का प्रकार, रिएक्टर की डिजाइन और संचालन की स्थिति। इसी कारण इस उत्पाद के लिए मानकीकरण आवश्यक हो जाता है, ताकि इसका सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

रिकवर्ड कार्बन ब्लैक का महत्व

रिकवर्ड कार्बन ब्लैक एक ठोस, कार्बन-समृद्ध पदार्थ है, जो पाइरोलिसिस प्रक्रिया के अवशेष के रूप में प्राप्त होता है। इसका उपयोग रबर, प्लास्टिक, स्याही, कोटिंग्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। यह वर्जिन कार्बन ब्लैक से अलग होता है, जो जीवाश्म ईंधन से बनाया जाता है। रिकवर्ड कार्बन ब्लैक के गुण टायर के प्रकार, तापमान और बाद की प्रोसेसिंग तकनीकों पर निर्भर करते हैं।

औद्योगिक और नियामक महत्व

औद्योगिक उप-उत्पादों के लिए मानक तय करना आवश्यक होता है, ताकि उनकी गुणवत्ता, परीक्षण विधियों और उपयोग की सीमाओं को स्पष्ट किया जा सके। नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित ये मानक टायर रीसाइक्लिंग उद्योग के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे। यह कदम अपशिष्ट से संसाधन बनाने की तकनीकों को बढ़ावा देगा और औद्योगिक सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सुनिश्चित करेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पाइरोलिसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ऑक्सीजन के बिना उच्च तापमान पर विघटन होता है।
  • एंड-ऑफ-लाइफ टायर वे होते हैं जो उपयोग के योग्य नहीं रहते और कचरे के रूप में वर्गीकृत होते हैं।
  • रिकवर्ड कार्बन ब्लैक, वर्जिन कार्बन ब्लैक से भिन्न होता है।
  • टायर पाइरोलिसिस से तेल, गैस, चार और स्टील वायर जैसे उत्पाद प्राप्त होते हैं।

नीति आयोग का यह प्रस्ताव भारत में सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल कचरे का प्रभावी प्रबंधन होगा, बल्कि औद्योगिक उत्पादन में भी नए अवसर उत्पन्न होंगे।

Originally written on May 6, 2026 and last modified on May 6, 2026.

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