निजी कंपनियों को हस्तांतरित होगी पीएसएलवी तकनीक, भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में नया अध्याय
भारत सरकार ने निजी अंतरिक्ष उद्योग को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) की तकनीक निजी कंपनियों को हस्तांतरित करने की योजना बनाई है। यह प्रक्रिया भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के माध्यम से संचालित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य निजी क्षेत्र को रॉकेट निर्माण और प्रक्षेपण सेवाओं में भागीदारी का अवसर प्रदान करना तथा भारत के अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
पीएसएलवी: भारत की विश्वसनीय प्रक्षेपण प्रणाली
पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित एक प्रमुख प्रक्षेपण यान है। इसका उपयोग मुख्य रूप से उपग्रहों को ध्रुवीय और सूर्य-समकालिक कक्षाओं में स्थापित करने के लिए किया जाता है। पीएसएलवी को भारत की सबसे सफल और विश्वसनीय लॉन्च प्रणालियों में गिना जाता है। इसने न केवल भारतीय उपग्रहों का प्रक्षेपण किया है, बल्कि अनेक विदेशी ग्राहकों के उपग्रहों को भी सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया है। इसकी सफलता ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में एक मजबूत पहचान दिलाई है।
तकनीक हस्तांतरण के लिए पात्रता मानदंड
पीएसएलवी तकनीक प्राप्त करने के लिए कंपनियों को कुछ निर्धारित शर्तों को पूरा करना होगा। पात्र कंपनी का भारतीयों के स्वामित्व और नियंत्रण में होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त कंपनी या कंसोर्टियम के कम से कम एक सदस्य के पास अंतरिक्ष या एयरोस्पेस क्षेत्र में न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। वित्तीय पात्रता के तहत कंपनी का पिछले पांच वर्षों में से किसी भी तीन वर्षों में वार्षिक कारोबार 400 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए या उसका मूल्यांकन कम से कम 1,000 करोड़ रुपये होना आवश्यक है। इन मानदंडों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल सक्षम और अनुभवी संस्थाएं इस महत्वपूर्ण तकनीक को अपनाएं।
इसरो और इन-स्पेस का सहयोग
तकनीक हस्तांतरण के बाद इन-स्पेस, इसरो के सहयोग से चयनित कंपनियों को बुनियादी ढांचा और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा। यह सहायता 30 महीनों तक या तब तक जारी रहेगी जब तक चयनित संस्था दो पीएसएलवी वाहनों का निर्माण और प्रक्षेपण सफलतापूर्वक नहीं कर लेती। इसके लिए अभिरुचि अभिव्यक्ति (Expression of Interest) प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे निजी क्षेत्र को रॉकेट उत्पादन और लॉन्च सेवाओं में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा। यह पहल भारत के अंतरिक्ष उद्योग में आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी का विस्तार
वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने का निर्णय लिया था। इस नीति परिवर्तन के बाद देश में अंतरिक्ष आधारित स्टार्टअप्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज कई निजी कंपनियां प्रक्षेपण यान, उपग्रह सेवाएं, पृथ्वी अवलोकन तकनीक और नेविगेशन प्रणालियों के विकास में कार्य कर रही हैं। इन-स्पेस निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए एकल खिड़की (सिंगल विंडो) प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है और उद्योग तथा सरकार के बीच समन्वय स्थापित करता है।
तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा
इन-स्पेस की टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड योजना के अंतर्गत जून 2026 तक कई नवाचारी स्टार्टअप्स का चयन किया गया है। इनमें एस्ट्रोबेस स्पेस टेक्नोलॉजीज, सैटश्योर एनालिटिक्स इंडिया और टीएम2स्पेस टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। ये कंपनियां उन्नत प्रणोदन प्रणाली, पृथ्वी अवलोकन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उपग्रह नेविगेशन तकनीकों पर कार्य कर रही हैं। वहीं न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण की जिम्मेदारी संभालती है, वर्ष 2020 से अब तक 100 से अधिक तकनीक हस्तांतरण समझौते कर चुकी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- इन-स्पेस (IN-SPACe) का पूरा नाम भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र है।
- एनएसआईएल (NSIL) का पूरा नाम न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड है।
- पीएसएलवी का उपयोग मुख्य रूप से ध्रुवीय और सूर्य-समकालिक कक्षाओं में उपग्रह प्रक्षेपण के लिए किया जाता है।
- टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड अंतरिक्ष क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास और अपनाने को प्रोत्साहित करने वाली योजना है।
पीएसएलवी तकनीक का निजी कंपनियों को हस्तांतरण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे निजी उद्योग को उन्नत प्रक्षेपण तकनीक तक पहुंच मिलेगी, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकेगा। यह पहल सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक अवसरों के नए द्वार खोलने की क्षमता रखती है।