नासा के रोमन टेलीस्कोप से गहरे अंतरिक्ष अनुसंधान को नई रफ्तार
नासा ने 30 अगस्त 2026 को अपने महत्वाकांक्षी नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप को स्पेसएक्स के फाल्कन हेवी रॉकेट से प्रक्षेपित किया। यह प्रक्षेपण फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39ए से हुआ और मिशन अब लगभग तीन महीने की यात्रा के बाद सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु 2 के पास अपनी विज्ञान कक्षा में पहुंचेगा।
रोमन टेलीस्कोप क्यों खास है
करीब 4.3 अरब डॉलर की लागत वाला यह नासा का प्रमुख वेधशाला मिशन है, जिसका वजन लगभग 18,000 पाउंड है। इसे ब्रह्मांड की उन बड़ी पहेलियों को समझने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें डार्क एनर्जी, डार्क मैटर और एक्सोप्लैनेट शामिल हैं। मिशन का वैज्ञानिक चरण पांच वर्षों के लिए नियोजित है।
रोमन टेलीस्कोप की सबसे बड़ी ताकत इसका 300-मेगापिक्सल वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट है, जो बड़े क्षेत्र की इन्फ्रारेड अवलोकन क्षमता देता है। इसकी दृष्टि-क्षमता हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक विस्तृत बताई जाती है। इसी वजह से यह एक साथ विशाल आकाशीय क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर सकेगा।
फाल्कन हेवी और लॉन्च के बाद की प्रक्रिया
स्पेसएक्स का फाल्कन हेवी एक भारी-भरकम प्रक्षेपण यान है, जिसमें फाल्कन 9 से विकसित तीन कोर होते हैं। प्रक्षेपण के बाद रोमन टेलीस्कोप ने ऊपरी चरण से 31 मिनट में अलग होकर अपनी अंतरिक्ष यात्रा शुरू की। अलगाव के बाद रॉकेट के दोनों साइड बूस्टर फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन स्थित लैंडिंग ज़ोन 2 और 40 पर सुरक्षित उतर गए।
मिशन की शुरुआती संचार व्यवस्था ट्रैकिंग एंड डेटा रिले सैटेलाइट के जरिए स्थापित की गई, जबकि बाद में ट्रैकिंग का काम नासा के डीप स्पेस नेटवर्क के कैनबरा कॉम्प्लेक्स को सौंपा गया। यह व्यवस्था पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष यानों के साथ संपर्क बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
सूर्य-पृथ्वी L2 बिंदु का महत्व
रोमन टेलीस्कोप को सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज पॉइंट 2, यानी L2, के पास भेजा गया है। यह सूर्य और पृथ्वी तंत्र के पांच लैग्रेंज बिंदुओं में से एक है और पृथ्वी की कक्षा के बाहर, सूर्य और पृथ्वी को जोड़ने वाली रेखा पर स्थित होता है। इस स्थान पर अंतरिक्ष यान अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति में रह सकता है, जिससे दीर्घकालिक वैज्ञानिक अवलोकन आसान हो जाते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नैंसी ग्रेस रोमन नासा की पहली चीफ एस्ट्रोनॉमर थीं, जिनके नाम पर इस टेलीस्कोप का नाम रखा गया है।
- सूर्य-पृथ्वी L2 बिंदु पृथ्वी की कक्षा के बाहर स्थित होता है और वैज्ञानिक मिशनों के लिए उपयोगी माना जाता है।
- रोमन टेलीस्कोप का वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट हबल की तुलना में लगभग 100 गुना बड़ा क्षेत्र देख सकता है।
- पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष यानों से संपर्क के लिए नासा डीप स्पेस नेटवर्क का उपयोग करता है।
रोमन स्पेस टेलीस्कोप का प्रक्षेपण नासा की गहरी अंतरिक्ष खोजों में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसकी विस्तृत सर्वेक्षण क्षमता आने वाले वर्षों में ब्रह्मांड की संरचना, विकास और रहस्यमयी घटकों को समझने में नई जानकारी दे सकती है।