नाउरू का ‘गोल्डन पासपोर्ट’ मॉडल जलवायु संकट से निपटने की नई कोशिश
प्रशांत महासागर के छोटे द्वीपीय देश नाउरू ने 1 जनवरी 2025 से एक ऐसा नागरिकता कार्यक्रम शुरू किया है, जो जलवायु अनुकूलन के लिए धन जुटाने से जुड़ा है। नाउरू इकोनॉमिक एंड क्लाइमेट रेज़िलिएंस सिटिजनशिप प्रोग्राम (ECRCP) के तहत आर्थिक योगदान के बदले नागरिकता और पासपोर्ट दिया जाता है। यह योजना इसलिए चर्चा में है क्योंकि इससे देश अपनी जलवायु-सम्बंधी पुनर्वास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना चाहता है।
जलवायु संकट और पुनर्वास की जरूरत
नाउरू एक निम्न-ऊंचाई वाला द्वीपीय देश है, जहां समुद्री जलस्तर बढ़ने और तटीय जोखिमों के कारण दीर्घकालिक अनुकूलन की जरूरत बढ़ गई है। इसी वजह से सरकार ने इस योजना को केवल राजस्व जुटाने का साधन नहीं, बल्कि पुनर्वास और अवसंरचना सुधार की रणनीति के रूप में पेश किया है। योजना के तहत लगभग 90 प्रतिशत नाउरू परिवारों और बुनियादी ढांचे को ऊंचे क्षेत्र में स्थानांतरित करने की बात शामिल है। पहले चरण की लागत 60 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक आंकी गई है।
नागरिकता के बदले आर्थिक योगदान
यह कार्यक्रम नागरिकता-के-बदले-निवेश यानी citizenship-by-investment मॉडल पर आधारित है, जिसे कई देशों में ‘गोल्डन पासपोर्ट’ योजना भी कहा जाता है। एकल आवेदक के लिए मानक योगदान 1,15,000 अमेरिकी डॉलर रखा गया है, जबकि 31 दिसंबर 2026 तक सीमित अवधि के लिए यह राशि घटाकर 90,000 अमेरिकी डॉलर कर दी गई है। सफल आवेदकों को नाउरू का पासपोर्ट मिलता है, जिससे 85 से अधिक गंतव्यों तक वीजा-मुक्त या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा संभव हो सकती है, जिनमें सिंगापुर और हांगकांग शामिल हैं।
सुरक्षा जांच और भूमि नियम
इस योजना में पात्रता जांच, पृष्ठभूमि सत्यापन, निरंतर निगरानी और आपराधिक गतिविधि पाए जाने पर नागरिकता रद्द करने का प्रावधान है। नाउरू की नागरिकता मिलने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति वहां भूमि खरीद सके, क्योंकि भूमि स्वामित्व पर अब भी मूल नाउरूवासियों के अधिकार सीमित हैं। यह पहल इसलिए भी ध्यान खींचती है क्योंकि 2000 के दशक की शुरुआत में नाउरू के एक पुराने पासपोर्ट कार्यक्रम को संदिग्ध आतंकियों से जुड़े आरोपों के बाद बंद कर दिया गया था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नाउरू प्रशांत महासागर में स्थित दुनिया के सबसे छोटे संप्रभु देशों में से एक है।
- नागरिकता-के-बदले-निवेश योजना को कई देशों में ‘गोल्डन पासपोर्ट’ स्कीम कहा जाता है।
- इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) यात्रा से पहले की एक स्क्रीनिंग व्यवस्था है, जो कुछ देशों में वीजा-मुक्त यात्रियों पर लागू होती है।
- नाउरू में भूमि स्वामित्व के नियम अब भी घरेलू कानूनों के तहत मूल नाउरूवासियों से जुड़े हुए हैं।
इस योजना से नाउरू को जलवायु अनुकूलन के लिए वित्तीय मदद मिलने की उम्मीद है, लेकिन नागरिकता बिक्री, सुरक्षा जांच और पासपोर्ट की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय निगाहें भी बनी हुई हैं।