ऑपरेशन त्रिशूल से भारत की भगोड़ा-वापसी रणनीति को मिली बड़ी सफलता

ऑपरेशन त्रिशूल से भारत की भगोड़ा-वापसी रणनीति को मिली बड़ी सफलता

भारत की भगोड़ा-वापसी और प्रत्यर्पण व्यवस्था को पिछले कुछ वर्षों में बड़ी मजबूती मिली है। ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़ों को वापस लाया गया है। इन मामलों में आतंकवाद, संगठित अपराध, नार्को-टेररिज्म, यौन अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी, हत्या और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप शामिल रहे हैं। सरकार ने 5 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी कि इस अभियान के जरिए अब तक इतनी बड़ी संख्या में वांछित व्यक्तियों को भारत लाया जा चुका है।

कैसे काम करता है ऑपरेशन त्रिशूल

यह अभियान उन लोगों की पहचान पर केंद्रित है जो विदेशों में जाकर नाम, पहचान या ठिकाना बदल लेते हैं। ऐसे भगोड़ों का पता लगाने के लिए उपग्रह चित्र, निगरानी से जुड़े इनपुट और डिजिटल फुटप्रिंट का उपयोग किया जाता है। इसके बाद विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बनाकर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इस ऑपरेशन में इंटेलिजेंस ब्यूरो, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), राज्य पुलिस बल और इंटरपोल की भूमिका अहम रहती है। विदेशों में छिपे अपराधियों तक पहुंचने के लिए यह बहु-एजेंसी ढांचा बेहद उपयोगी माना जा रहा है।

प्रत्यर्पण क्यों है महत्वपूर्ण

प्रत्यर्पण का अर्थ है किसी व्यक्ति को एक देश द्वारा दूसरे देश को कानूनी प्रक्रिया के तहत सौंपना, ताकि उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके या सजा दी जा सके। भारत के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर आर्थिक अपराधों और गंभीर आपराधिक मामलों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई आरोपी अपराध के बाद देश छोड़कर विदेशों में शरण ले लेते हैं। सरकार के अनुसार 2025 में 70 भगोड़ों को वापस लाया गया, जबकि जुलाई 2026 तक कम से कम 45 और भगोड़ों की वापसी हो चुकी थी। यह दिखाता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी निगरानी के जरिए भगोड़ों पर दबाव बढ़ाने में अधिक सक्षम हुआ है।

वित्तीय अपराधों पर भी सख्ती

भगोड़ों की वापसी के साथ-साथ अपराध से अर्जित संपत्ति पर भी कार्रवाई की जा रही है। भारत में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अपराध की आय को जब्त और वसूल करने की व्यवस्था है। 2019 से 2026 के बीच इस कानून के तहत ₹17,874 करोड़ की संपत्तियां अटैच की गईं और ₹18,762 करोड़ की पुनर्स्थापना की गई। यह संकेत है कि सरकार केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध से कमाई गई संपत्ति को भी निशाना बना रही है। इससे आर्थिक अपराधों के नेटवर्क पर असर पड़ता है और जांच एजेंसियों को मजबूत कानूनी आधार मिलता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़ों को भारत लाया गया है।
  • इन मामलों में आतंकवाद, संगठित अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी, हत्या और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध शामिल रहे हैं।
  • BHARATPOL को जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था, ताकि 1,400 से अधिक राज्य और केंद्रीय कानून-प्रवर्तन इकाइयों को इंटरपोल से जोड़ा जा सके।
  • CBI ने अंतरराष्ट्रीय भगोड़ों से जुड़े समन्वय के लिए एक विशेष ग्लोबल ऑपरेशंस सेंटर स्थापित किया है।

कुल मिलाकर, ऑपरेशन त्रिशूल भारत की उस बदलती रणनीति का हिस्सा है जिसमें तकनीक, खुफिया समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए विदेशों में छिपे अपराधियों तक पहुंच बनाई जा रही है। यह रुझान आने वाले समय में प्रत्यर्पण और आर्थिक अपराध नियंत्रण दोनों को और प्रभावी बना सकता है।

Originally written on August 5, 2026 and last modified on August 5, 2026.

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