नई गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अवधि बढ़ी

नई गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अवधि बढ़ी

सुप्रीम कोर्ट ने नई निजी कारों और दोपहिया वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया है। अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुपालन से जुड़ी सुनवाई में यह आदेश दिया, जिससे नए वाहनों के बीमा ढांचे और प्रवर्तन व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।

नई गाड़ियों के लिए बदली बीमा अवधि

अदालत के निर्देश के अनुसार, नई निजी कारों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा की अनिवार्य अवधि तीन साल से बढ़ाकर चार साल कर दी गई है। वहीं, नई दोपहिया गाड़ियों के लिए यह अवधि पांच साल से बढ़ाकर छह साल की गई है। यह बदलाव केवल नए वाहनों पर लागू होगा और इसका उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों के बीमा कवरेज को अधिक प्रभावी बनाना है। थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस भारत में सार्वजनिक सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए अनिवार्य है। यह बीमा किसी तीसरे पक्ष को वाहन से हुई चोट, मृत्यु या संपत्ति नुकसान की कानूनी भरपाई से जुड़ा होता है। इसी कारण इसे सड़क सुरक्षा और दायित्व व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है।

IRDAI को तुरंत निर्देश, अनुपालन पर अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण, यानी IRDAI, को संशोधित बीमा अवधि लागू करने के लिए तुरंत निर्देश जारी करने को कहा है। साथ ही, संबंधित पक्षों को 14 अगस्त 2026 तक हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया गया है और मामले को 18 अगस्त 2026 को अनुपालन समीक्षा के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अदालत ने निजी वाहनों के लिए एक समान चार-स्तरीय पॉलिसी ढांचे का भी उल्लेख किया, जिसमें अनिवार्य थर्ड-पार्टी कवर के साथ वैकल्पिक बीमा सुविधाएं और एक मानकीकृत ग्राहक विकल्प फॉर्म शामिल हो सकता है। इसका मकसद बीमा खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाना है।

बिना बीमा वाहनों पर सख्ती की तैयारी

अदालत ने बिना बीमा वाले वाहनों पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त प्रवर्तन उपायों का भी सुझाव दिया। इनमें “नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल” पायलट प्रोजेक्ट और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो तथा VAHAN डेटाबेस से जोड़ने की बात शामिल है। VAHAN देश का राष्ट्रीय वाहन पंजीकरण डेटाबेस है, जबकि ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम नंबर प्लेट के आधार पर वाहन की पहचान करने में मदद करता है। इन तकनीकी उपायों के जरिए बिना बीमा वाहनों की पहचान और निगरानी आसान हो सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मोटर वाहन अधिनियम, 1988 भारत में सड़क परिवहन और वाहन बीमा से जुड़े नियमों का आधार है।
  • थर्ड-पार्टी बीमा वाहन मालिक या चालक के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को हुई क्षति की कानूनी भरपाई से जुड़ा होता है।
  • IRDAI भारत में बीमा क्षेत्र का वैधानिक नियामक है और यह IRDAI अधिनियम, 1999 के तहत काम करता है।
  • VAHAN और Insurance Information Bureau वाहन और बीमा संबंधी डेटा प्रबंधन में उपयोग किए जाते हैं।

इस आदेश से नए वाहनों के बीमा कवरेज को लंबी अवधि तक सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ा है। साथ ही, तकनीक आधारित निगरानी और सख्त अनुपालन उपायों के जरिए बिना बीमा वाहनों पर नियंत्रण की कोशिश भी तेज हो सकती है।

Originally written on August 5, 2026 and last modified on August 5, 2026.

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