देश के चार राज्यों में बनेंगे मेगा लेदर और फुटवियर क्लस्टर
देश में चमड़ा, फुटवियर और संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर विकसित कर रही है। इन परियोजनाओं में कुल लगभग 898 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। इन क्लस्टरों का उद्देश्य उद्योगों को आधुनिक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक चमड़ा एवं फुटवियर विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।
मेगा लेदर क्लस्टर क्या हैं?
मेगा लेदर क्लस्टर विशेष औद्योगिक पार्क होते हैं, जहां चमड़ा उत्पाद, फुटवियर, बैग, बेल्ट, एक्सेसरीज़ और संबंधित उद्योगों की इकाइयों को एक ही स्थान पर स्थापित किया जाता है। इन क्लस्टरों में औद्योगिक भूखंड, सड़क संपर्क, गोदाम, लॉजिस्टिक सुविधाएं तथा साझा बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाता है। जहां टेनरी इकाइयां स्थापित होती हैं, वहां पर्यावरण संरक्षण के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की भी व्यवस्था की जाती है।
बिहार में दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में चमड़ा उत्पाद और फुटवियर उद्योग के लिए एक ग्रीनफील्ड क्लस्टर को अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है। यह परियोजना भारतीय फुटवियर एवं लेदर विकास कार्यक्रम 2021-26 के अंतर्गत विकसित की जा रही है। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीआईएडीए) इस परियोजना का विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) है। यह क्लस्टर लगभग 62.17 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा किशनगंज जिले के भेड़ियाडांगी क्षेत्र में 33.77 एकड़ भूमि पर चमड़ा प्रसंस्करण टेनरियों के लिए एक अलग ग्रीनफील्ड क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना में प्रदूषण नियंत्रण के लिए समर्पित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था भी शामिल है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की परियोजनाएं
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में रतवाड़ क्षेत्र में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर पार्क को केंद्र सरकार से सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। यह परियोजना 151 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए 125 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव रखा है। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम ने इस क्लस्टर में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए उद्यमियों से रुचि अभिव्यक्ति भी आमंत्रित की थी। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में भी मेगा लेदर फुटवियर एवं एक्सेसरीज़ क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का कार्य मार्च 2024 में शुरू हुआ और इसे सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्ष 2026 में परियोजना की स्थिति “नोटिस टू प्रोसीड” के रूप में अद्यतन की गई थी।
तमिलनाडु का रणिपेट भी योजना में शामिल
तमिलनाडु का रणिपेट क्षेत्र लंबे समय से चमड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है। केंद्र सरकार की मेगा क्लस्टर योजना में रणिपेट को भी शामिल किया गया है, जिससे दक्षिण भारत के चमड़ा उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है। यह क्षेत्र पहले से ही चमड़ा उत्पादों के निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय फुटवियर एवं लेदर विकास कार्यक्रम 2021-26 केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है।
- कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का उपयोग कई औद्योगिक इकाइयों के अपशिष्ट जल के सामूहिक उपचार के लिए किया जाता है।
- मुजफ्फरपुर बिहार में, रायगढ़ महाराष्ट्र में और मुरैना मध्य प्रदेश में स्थित है।
- रणिपेट तमिलनाडु का एक प्रमुख औद्योगिक एवं चमड़ा उत्पादन केंद्र माना जाता है।
देश में विकसित किए जा रहे ये मेगा लेदर और फुटवियर क्लस्टर न केवल औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देंगे, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित करेंगे। आधुनिक अवसंरचना, बेहतर लॉजिस्टिक्स और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं के माध्यम से ये परियोजनाएं भारत के चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं।