दिल्ली में बच्चों के खिलाफ अपराध और किशोर अपराध के सबसे अधिक मामले दर्ज

दिल्ली में बच्चों के खिलाफ अपराध और किशोर अपराध के सबसे अधिक मामले दर्ज

राष्ट्रीय राजधानी Delhi में वर्ष 2024 के दौरान बच्चों के खिलाफ अपराध और किशोरों द्वारा किए गए अपराधों के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। National Crime Records Bureau की “क्राइम इन इंडिया 2024” रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बच्चों के खिलाफ 7,662 मामले दर्ज हुए, जबकि किशोरों द्वारा किए गए अपराधों के 2,306 मामले सामने आए। यह आंकड़े देश के महानगरों में सबसे अधिक हैं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं।

बच्चों के खिलाफ अपराध के आंकड़े

दिल्ली में बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले पिछले कुछ वर्षों से लगातार उच्च स्तर पर बने हुए हैं। वर्ष 2022 में ऐसे 7,468 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में बढ़कर 7,769 हो गए। वर्ष 2024 में यह संख्या मामूली रूप से घटकर 7,662 रही। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बच्चों के खिलाफ अपराध की दर 138.4 मामले प्रति एक लाख बाल जनसंख्या रही। यह राष्ट्रीय औसत 42.3 मामलों प्रति एक लाख बाल जनसंख्या से तीन गुना से भी अधिक है।

अपहरण और किडनैपिंग के मामले सबसे अधिक

दिल्ली में बच्चों के खिलाफ अपराधों में सबसे बड़ा हिस्सा अपहरण और किडनैपिंग के मामलों का रहा। वर्ष 2024 में ऐसे 5,404 मामले दर्ज किए गए। तुलना करें तो मुंबई में 1,831 और बेंगलुरु में 1,136 मामले दर्ज हुए। अपहरण और किडनैपिंग से संबंधित अपराध अब Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 के अंतर्गत आते हैं, जिसने 1 जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता 1860 का स्थान लिया है।

किशोर अपराध में भी दिल्ली शीर्ष पर

दिल्ली ने किशोर अपराध यानी जुवेनाइल क्राइम के मामलों में भी देश के महानगरों में पहला स्थान हासिल किया। वर्ष 2024 में यहां 2,306 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 2,278 थी। दिल्ली में किशोर अपराध दर लगभग 42 “चाइल्ड इन कॉन्फ्लिक्ट विद लॉ” मामले प्रति एक लाख नाबालिग रही। इनमें चोरी के 526 मामले, स्नैचिंग के 217 मामले और हत्या के प्रयास के 210 मामले शामिल थे।

जुवेनाइल जस्टिस कानून और एनसीआरबी

भारत में किशोर अपराधों और संरक्षण से जुड़े मामलों का संचालन Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 के तहत किया जाता है। यह कानून कानून से संघर्ष में आए बच्चों और देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए लागू होता है। एनसीआरबी “चाइल्ड इन कॉन्फ्लिक्ट विद लॉ” शब्द का उपयोग उन 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए करता है, जो किसी अपराध में शामिल पाए जाते हैं।

किशोरों की गिरफ्तारी और शिक्षा स्तर

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में वर्ष 2024 के दौरान 3,270 किशोरों को विभिन्न अपराधों में पकड़ा गया। इनमें से 1,672 किशोर ऐसे थे, जिनकी शिक्षा प्राथमिक से लेकर मैट्रिक स्तर तक थी। यह आंकड़ा शिक्षा और सामाजिक परिस्थितियों के बीच संबंध को भी दर्शाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • पॉक्सो अधिनियम 2012 बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित प्रमुख कानून है।
  • दिल्ली को अनुच्छेद 239AA के तहत विशेष संवैधानिक दर्जा प्राप्त है।
  • “चाइल्ड इन कॉन्फ्लिक्ट विद लॉ” शब्द 18 वर्ष से कम आयु के अपराध में शामिल बच्चों के लिए उपयोग किया जाता है।

दिल्ली में बच्चों के खिलाफ अपराध और किशोर अपराध के बढ़ते मामले यह संकेत देते हैं कि बाल सुरक्षा, शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सुधारात्मक तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए समाज और प्रशासन दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Originally written on May 7, 2026 and last modified on May 7, 2026.

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