दिल्ली में पुराने कमर्शियल वाहनों के नवीनीकरण को नई रफ्तार
दिल्ली सरकार ने 20 जुलाई 2026 को PARIVARTAN योजना को मंजूरी देकर राजधानी और एनसीआर में वायु प्रदूषण घटाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यह योजना पुराने कमर्शियल वाहनों को स्क्रैप कर स्वच्छ और नए वाहनों से बदलने पर केंद्रित है। खास बात यह है कि यह सिर्फ वाहन बदलने की योजना नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में उत्सर्जन कम करने और फ्लीट रिन्यूअल को बढ़ावा देने का एक व्यापक ढांचा है।PARIVARTAN का पूरा नाम Programme for Accelerated Renewal and Incentivisation of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions है। इसे केंद्र सरकार की मदद से लागू किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून 2026 को इस योजना को मंजूरी दी थी, जबकि इसके संचालन से जुड़े दिशानिर्देश 16 जुलाई 2026 को आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने जारी किए।
किसे मिलेगा योजना का लाभ
यह योजना दिल्ली-एनसीआर में चलने वाले उन कमर्शियल वाहनों पर लागू होगी जो BS-IV या उससे पुराने मानक के हैं। इनमें लाइट गुड्स व्हीकल, मीडियम गुड्स व्हीकल, हेवी गुड्स व्हीकल और बसें शामिल हैं। योजना का उद्देश्य ऐसे वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बढ़ावा देना है।BS-IV या पुराने लाइट गुड्स व्हीकल को स्क्रैप कर नया इलेक्ट्रिक लाइट गुड्स व्हीकल खरीदने पर कई तरह की राहत दी जाएगी। इसी तरह BS-VI या इलेक्ट्रिक मीडियम गुड्स व्हीकल, हेवी गुड्स व्हीकल और बसों के लिए भी प्रोत्साहन तय किए गए हैं।
क्या-क्या प्रोत्साहन मिलेंगे
योजना के तहत पात्र वाहन मालिकों को 10 साल तक मोटर वाहन कर में 100% छूट मिलेगी। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ होगी, 5% ब्याज सब्सिडी दी जाएगी और OEM यानी वाहन निर्माता की ओर से 8% की छूट भी उपलब्ध होगी।जो पुराने वाहन स्क्रैप किए जाएंगे, उनसे जुड़ा बकाया रोड टैक्स और फिटनेस पेनल्टी भी राहत के दायरे में आएगी। इससे वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ कम होगा और नए वाहनों की ओर संक्रमण आसान बनेगा।
प्रशासनिक ढांचा और महत्व
इस कार्यक्रम को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय लागू करेगा, जबकि इसके लिए वित्तीय सहायता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड देगा। अनुमान है कि इस योजना से दिल्ली-एनसीआर में लगभग 2.07 लाख ट्रक और बस मालिकों को लाभ मिलेगा।दिल्ली सरकार ने PARIVARTAN को अपनी दिल्ली EV Policy 2026 से भी जोड़ा है। इससे साफ है कि सरकार का फोकस केवल निजी इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारी प्रदूषण फैलाने वाले कमर्शियल ट्रांसपोर्ट को भी स्वच्छ तकनीक की ओर ले जाना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- BS-IV और BS-VI भारत में वाहन उत्सर्जन नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले भारत स्टेज मानक हैं।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली के साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ जिले शामिल हैं।
- आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय शहरी परिवहन और शहरों के बुनियादी ढांचे से जुड़ी नीतियों में भूमिका निभाता है।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड एक वैधानिक निकाय है, जो एनसीआर के क्षेत्रीय नियोजन से जुड़ा है।
कुल मिलाकर, PARIVARTAN योजना दिल्ली-एनसीआर में पुराने कमर्शियल वाहनों को हटाकर स्वच्छ, आधुनिक और कम प्रदूषणकारी परिवहन व्यवस्था की ओर बढ़ने का संकेत देती है। यह कदम वायु गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ वाहन क्षेत्र में नवीनीकरण को भी गति दे सकता है।