तीनों सेनाओं की भविष्य युद्ध तैयारी को नई धार
नई दिल्ली में 30 अगस्त 2026 को त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम का चौथा संस्करण संपन्न हुआ। 3 अगस्त 2026 से मानेकशॉ सेंटर में शुरू हुए इस चार सप्ताह के कार्यक्रम का संचालन इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय के तहत और सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज के समन्वय से किया गया। यह पाठ्यक्रम भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों के लिए संयुक्त सैन्य शिक्षा का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है, जिसमें रक्षा क्षेत्र से जुड़े अकादमिक, सरकारी और रणनीतिक संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं।
भविष्य के युद्ध की बदलती रूपरेखा
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उन तकनीकों और युद्ध-परिदृश्यों पर चर्चा करना था, जो आने वाले समय में सैन्य रणनीति को प्रभावित करेंगे। पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर युद्ध, संज्ञानात्मक युद्ध, स्वायत्त प्रणालियाँ, अंतरिक्ष संचालन और ग्रे-ज़ोन युद्ध जैसे विषय शामिल रहे। ये सभी क्षेत्र आधुनिक रक्षा योजना में तेजी से अहम हो रहे हैं, क्योंकि भविष्य के संघर्ष केवल जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सूचना, तकनीक और बहु-क्षेत्रीय संचालन पर भी निर्भर होंगे।
संयुक्त प्रशिक्षण से बढ़ती त्रि-सेवा समझ
त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम भारतीय सशस्त्र बलों के बीच साझा समझ और समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक व्यावहारिक पहल है। ऐसे कार्यक्रमों में अलग-अलग सेवाओं के अधिकारी एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं, जिससे संयुक्त योजना, संयुक्त संचालन और उभरते खतरों के प्रति एकीकृत दृष्टिकोण विकसित होता है। रक्षा क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक तैयारी का भी हिस्सा है।
समापन सत्र में नेतृत्व और सम्मान
समापन सत्र के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने प्रतिभागियों से संवाद किया। एयर मार्शल तेजिंदर सिंह, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी ने प्रतिभागियों को पाठ्यक्रम पूर्णता प्रमाणपत्र प्रदान किए। वहीं, आईआईटी रोपड़ स्थित डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. महल ने स्नातक अधिकारियों को फ्यूचर वारफेयर में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रदान किए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ मुख्यालय, रक्षा मंत्रालय के अधीन एक त्रि-सेवा संगठन है।
- सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज संयुक्त सैन्य अध्ययन और रणनीतिक शोध से जुड़ा संस्थान है।
- मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली का प्रमुख रक्षा स्थल है, जिसका नाम फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के नाम पर रखा गया है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और साइबर युद्ध आधुनिक सैन्य सिद्धांत के प्रमुख विषय माने जाते हैं।
यह पाठ्यक्रम दिखाता है कि भारतीय सेनाएँ भविष्य की चुनौतियों के लिए तकनीक-आधारित और संयुक्त दृष्टिकोण को लगातार मजबूत कर रही हैं। बदलते युद्ध-परिदृश्य में ऐसी पहलें रक्षा तैयारियों को अधिक समन्वित और प्रभावी बनाने में मदद करती हैं।