तरंग शक्ति 2026 में जर्मन A400M से बढ़ी बहुराष्ट्रीय वायु-समन्वय की ताकत
भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति 2026 में जर्मनी के एयरबस A400M सैन्य परिवहन विमान की भागीदारी ने संयुक्त वायु अभियानों की क्षमता को और मजबूत किया है। राजस्थान के जोधपुर वायुसेना स्टेशन और आसपास के एयरबेसों पर 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक चल रहे इस अभ्यास का फोकस अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच तालमेल, बड़े पैमाने पर उड़ान संचालन और परिवहन विमानों के समन्वय पर है।
‘पावर इन पार्टनरशिप’ के तहत संयुक्त उड़ान अभ्यास
तरंग शक्ति 2026 इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास का दूसरा संस्करण है और इसका थीम “Power in Partnership” रखा गया है। अभ्यास में फाइटर ऑपरेशंस, बड़े वायु-समूह के साथ उड़ान, और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की संयुक्त गतिविधियाँ शामिल हैं। जर्मन A400M और उसके चालक दल को भी ऐसे ही बड़े वायु-समूह अभियानों में शामिल किया गया है, ताकि विभिन्न देशों के विमान और क्रू एक साथ बेहतर ढंग से काम कर सकें।
जर्मन वायुसेना के कैप्टन मॉरिस बर्न्स ने 6 अक्टूबर 2026 को कहा कि यह अभ्यास ट्रांसपोर्ट क्रू को बड़े फॉर्मेशन में संचालन का अनुभव देता है और भारतीय वायुसेना के साथ समन्वय को बेहतर बनाता है।
कौन-कौन से देश और विमान शामिल हैं
इस अभ्यास में कई मित्र देशों की वायुसेनाएँ अपने एयर एसेट्स के साथ भाग ले रही हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में ग्रीस को भी उड़ान भागीदार के रूप में उल्लेखित किया गया है, जिससे भाग लेने वाले विदेशी देशों की संख्या आठ तक मानी जा रही है।
अमेरिकी वायुसेना के F-35 Lightning II लड़ाकू विमान, फ्रांसीसी Rafale और यूएई के F-16 भी अभ्यास का हिस्सा हैं। खास बात यह है कि F-35 Lightning II पहली बार किसी भारतीय बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास में भाग ले रहा है।
भारतीय वायुसेना के लिए क्यों अहम है यह अभ्यास
तरंग शक्ति 2026 का उद्देश्य केवल उड़ान प्रदर्शन नहीं, बल्कि अलग-अलग वायुसेनाओं के बीच परिचालन समझ, संचार, योजना और संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाना है। 27 सितंबर 2026 से शुरू हुए ऑपरेशनल चरण में 80 से अधिक भारतीय और विदेशी विमान शामिल हैं। लगभग 1,500 कर्मी इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं, जबकि 32 अन्य देश पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद हैं।
यह अभ्यास भारत की उस रणनीतिक क्षमता को भी दिखाता है जिसमें वह मित्र देशों के साथ बड़े स्तर पर वायु सहयोग आयोजित कर सकता है। जोधपुर और राजस्थान के अन्य एयरबेस इस तरह के बहुराष्ट्रीय हवाई संचालन के लिए महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तरंग शक्ति 2026, भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास का दूसरा संस्करण है।
- यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक जोधपुर और राजस्थान के आसपास के एयरबेसों पर आयोजित हो रहा है।
- अमेरिकी F-35 Lightning II पहली बार किसी भारतीय बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास में शामिल हुआ है।
- इस अभ्यास में 80 से अधिक विमान, लगभग 1,500 कर्मी और 32 पर्यवेक्षक देशों की भागीदारी दर्ज की गई है।
जर्मन A400M की भागीदारी ने तरंग शक्ति 2026 को केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि बहुराष्ट्रीय वायु सहयोग और सामरिक समन्वय का महत्वपूर्ण मंच बना दिया है।