डॉ. सौम्या स्वामीनाथन बनीं रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन की फेलो

डॉ. सौम्या स्वामीनाथन बनीं रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन की फेलो

भारत की प्रसिद्ध चिकित्सक एवं जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सौम्या स्वामीनाथन को 10 जुलाई 2026 को औपचारिक रूप से रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन की फेलोशिप प्रदान की गई। उनका चयन मई 2026 में किया गया था। रॉयल सोसाइटी यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अकादमी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1660 में हुई थी। विज्ञान के क्षेत्र में यह फेलोशिप विश्व के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिनी जाती है और केवल उन वैज्ञानिकों को प्रदान की जाती है जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो।

रॉयल सोसाइटी फेलोशिप क्या है?

रॉयल सोसाइटी की फेलोशिप प्राप्त करने वाले वैज्ञानिक अपने नाम के साथ एफआरएस (Fellow of the Royal Society) का उपयोग कर सकते हैं। यह सम्मान प्राकृतिक विज्ञान, गणित, अभियांत्रिकी और अनुप्रयुक्त विज्ञान के क्षेत्रों में उत्कृष्ट शोध और ज्ञानवर्धन के लिए दिया जाता है। वर्ष 2026 में रॉयल सोसाइटी ने अपने 365 वर्ष पूरे किए। यह विश्व की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अकादमियों में से एक है तथा इसके फेलो विश्वभर के अग्रणी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों में से चुने जाते हैं।

भारतीय महिला वैज्ञानिकों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

डॉ. सौम्या स्वामीनाथन रॉयल सोसाइटी की फेलो बनने वाली दूसरी भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं। इससे पहले वर्ष 2019 में प्रोफेसर गगनदीप कांग यह सम्मान प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। इसके साथ ही डॉ. सौम्या स्वामीनाथन और उनके पिता एम. एस. स्वामीनाथन भारत के पहले पिता-पुत्री बने हैं जिन्हें रॉयल सोसाइटी की फेलोशिप प्राप्त हुई है। यह भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

वैज्ञानिक योगदान और प्रमुख जिम्मेदारियां

डॉ. सौम्या स्वामीनाथन बाल्यावस्था के तपेदिक (टीबी) पर शोध, क्लिनिकल ट्रांसलेशनल मेडिसिन, टीका विकास तथा टीकाकरण नीति के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में मुख्य वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया और कोविड-19 महामारी सहित कई वैश्विक जनस्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फरवरी 2023 से वह एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। इसके अलावा, वह भारत के राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की प्रधान सलाहकार के रूप में भी कार्य कर रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रॉयल सोसाइटी की स्थापना वर्ष 1660 में लंदन में हुई थी और यह विश्व की सबसे पुरानी वैज्ञानिक अकादमियों में से एक है।
  • रॉयल सोसाइटी के फेलो अपने नाम के साथ एफआरएस (Fellow of the Royal Society) लिखते हैं।
  • महान वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन भी रॉयल सोसाइटी के फेलो थे और उनके हस्ताक्षर आज भी सोसाइटी के अभिलेखों में सुरक्षित हैं।
  • डॉ. सौम्या स्वामीनाथन और एम. एस. स्वामीनाथन भारत के पहले पिता-पुत्री हैं जिन्हें रॉयल सोसाइटी की फेलोशिप प्राप्त हुई है।

डॉ. सौम्या स्वामीनाथन को रॉयल सोसाइटी की फेलोशिप मिलना भारतीय विज्ञान और वैश्विक जनस्वास्थ्य के क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान न केवल उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान की पहचान है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिकों के लिए भी प्रेरणादायक उपलब्धि है।

Originally written on July 13, 2026 and last modified on July 13, 2026.

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