डॉट की समृद्ध ग्राम परियोजना ने जीता डब्ल्यूएसआईएस प्राइज 2026 का वैश्विक सम्मान
भारत के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications-DoT) की समृद्ध ग्राम इंटीग्रेटेड फिजिटल सर्विसेज परियोजना ने 9 जुलाई 2026 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित डब्ल्यूएसआईएस प्राइज 2026 (WSIS Prizes 2026) में ‘एनेबलिंग एनवायरनमेंट’ श्रेणी में ग्लोबल विनर का खिताब हासिल किया। यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल समावेशन और आधुनिक सेवा वितरण के क्षेत्र में भारत के प्रयासों को वैश्विक स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता है। यह परियोजना फिजिटल (Phygital) मॉडल पर आधारित है, जिसमें भौतिक सेवा केंद्रों को भारतनेट की डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ जोड़ा गया है।
समृद्ध ग्राम पहल क्या है?
समृद्ध ग्राम, दूरसंचार विभाग द्वारा विकसित एक एकीकृत ग्रामीण डिजिटल समावेशन मॉडल है। इसमें ‘फिजिटल’ अवधारणा अपनाई गई है, जिसका अर्थ है भौतिक (Physical) और डिजिटल (Digital) सेवाओं का समन्वित उपयोग। इस पहल के अंतर्गत समृद्धि केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जो ग्रामीण समुदाय के लिए एकल सेवा केंद्र (One-Stop Community Hub) के रूप में कार्य करते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, कौशल विकास, स्मार्ट कृषि, ई-गवर्नेंस, वित्तीय समावेशन, ई-कॉमर्स तथा सार्वजनिक सुरक्षा जैसी अनेक सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
भारतनेट की भूमिका और ग्रामीण कनेक्टिविटी
समृद्ध ग्राम परियोजना का आधार भारतनेट है, जो ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने वाली भारत की राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड परियोजना है। इसी नेटवर्क का उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों तक अंतिम छोर (Last-Mile) की डिजिटल सेवाएं पहुंचाई जाती हैं। प्रत्येक समृद्धि केंद्र को इस प्रकार विकसित किया गया है कि वह लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई गांवों को सेवाएं प्रदान कर सके। इस परियोजना के पायलट केंद्र मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव, आंध्र प्रदेश के नरकोडुरु तथा उत्तर प्रदेश के चौरावाला में स्थापित किए गए हैं।
डब्ल्यूएसआईएस प्राइज और आईटीयू
डब्ल्यूएसआईएस (World Summit on the Information Society) प्राइज सूचना समाज के विकास से जुड़े उत्कृष्ट डिजिटल नवाचारों को सम्मानित करने वाला वैश्विक पुरस्कार है। इसका संचालन अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International Telecommunication Union-ITU) द्वारा किया जाता है। ‘एनेबलिंग एनवायरनमेंट’ श्रेणी में उन परियोजनाओं को सम्मानित किया जाता है जो डिजिटल पहुंच, नीतिगत ढांचे और प्रभावी सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत बनाती हैं। जिनेवा स्थित आईटीयू संयुक्त राष्ट्र की सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी से संबंधित विशेषीकृत एजेंसी है।
समुदाय की भागीदारी और परियोजना का महत्व
समृद्ध ग्राम मॉडल में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन (Digital Empowerment Foundation) इस परियोजना के फील्ड संचालन और सामुदायिक जागरूकता में सहयोग कर रहा है। यह पहल गांवों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और ग्रामीण नागरिकों को तकनीक आधारित सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की स्थापना वर्ष 1865 में हुई थी और यह 1947 में संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी बना।
- भारतनेट विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक है।
- फिजिटल (Phygital) मॉडल में भौतिक अवसंरचना और डिजिटल सेवाओं का संयुक्त उपयोग किया जाता है।
- टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, वित्तीय समावेशन और डिजिटल शिक्षा भारत की डिजिटल सार्वजनिक सेवा प्रणाली के प्रमुख घटक हैं।
समृद्ध ग्राम परियोजना को मिला डब्ल्यूएसआईएस प्राइज 2026 का वैश्विक सम्मान भारत की ग्रामीण डिजिटल परिवर्तन यात्रा की बड़ी उपलब्धि है। भारतनेट, फिजिटल सेवा मॉडल और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से यह पहल गांवों तक आधुनिक डिजिटल सेवाएं पहुंचाकर समावेशी विकास और डिजिटल सशक्तिकरण को नई दिशा प्रदान कर रही है।