डेनमार्क में भारत के पैरा-साइक्लिस्टों का शानदार प्रदर्शन
डेनमार्क के ओडेंस शहर में आयोजित यूसीआई पैरा-स्पोर्ट्स डेनमार्क ग्रां प्री में भारतीय पैरा-साइक्लिस्टों ने 12 पदक जीतकर प्रभावशाली प्रदर्शन किया। तीन दिन चली ट्रैक साइक्लिंग स्पर्धा में भारत ने 2 स्वर्ण, 5 रजत और 5 कांस्य पदक अपने नाम किए।
भारत के पदक विजेताओं ने दिलाई बड़ी सफलता
इस प्रतियोगिता में आंध्र प्रदेश के अरशद शेख भारत के सबसे सफल खिलाड़ी रहे। उन्होंने एमसी2 वर्ग में छह व्यक्तिगत पदक जीते, जिनमें दो स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य शामिल रहा। अरशद ने एलिमिनेशन रेस में दोनों स्वर्ण पदक जीते, जबकि व्यक्तिगत टाइम ट्रायल, व्यक्तिगत पर्स्यूट और स्क्रैच रेस में रजत पदक हासिल किए। 200 मीटर स्प्रिंट में उन्हें कांस्य मिला।
गुजरात के 17 वर्षीय विश्व वसानी ने डब्ल्यूसी3 वर्ग में चार कांस्य पदक जीते। उनके पदक 1 किलोमीटर व्यक्तिगत टाइम ट्रायल, स्क्रैच रेस, 200 मीटर स्प्रिंट और एलिमिनेशन रेस में आए। महाराष्ट्र के 16 वर्षीय अंशुमन धुमाल ने एलिमिनेशन रेस में दो रजत पदक जीतकर भारत की पदक तालिका को और मजबूत किया।
पैरा-साइक्लिंग में वर्गीकरण और स्पर्धाओं की अहमियत
पैरा-साइक्लिंग में खिलाड़ियों को उनकी शारीरिक अक्षमता के प्रकार और स्तर के आधार पर अलग-अलग खेल वर्गों में रखा जाता है। एमसी2 और डब्ल्यूसी3 जैसे वर्ग यूसीआई की पैरा-साइक्लिंग प्रणाली का हिस्सा हैं। ट्रैक साइक्लिंग मुकाबले वेलोड्रोम पर होते हैं, जहां तय दूरी की रेस, समय आधारित स्पर्धाएं और आमने-सामने की रणनीतिक रेस कराई जाती हैं।
200 मीटर स्प्रिंट जैसी स्पर्धा गति और प्रतिक्रिया क्षमता की परीक्षा लेती है, जबकि व्यक्तिगत पर्स्यूट और एलिमिनेशन रेस में सहनशक्ति, रफ्तार और रणनीति तीनों की भूमिका होती है। इसी वजह से ऐसे टूर्नामेंट खिलाड़ियों की तकनीकी और मानसिक तैयारी दोनों को परखते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूसीआई यानी Union Cycliste Internationale साइक्लिंग खेल की वैश्विक शासी संस्था है।
- ओडेंस डेनमार्क का एक प्रमुख शहर है, जहां अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग प्रतियोगिताएं आयोजित होती रही हैं।
- पैरा-साइक्लिंग में ट्रैक और रोड, दोनों तरह की स्पर्धाएं यूसीआई नियमों के तहत होती हैं।
- भारत ने यूसीआई पैरा-स्पोर्ट्स डेनमार्क ग्रां प्री 2026 में कुल 12 पदक जीते।
भारतीय दल को इस प्रतियोगिता में संस्थागत समर्थन भी मिला, जिससे पैरा-साइक्लिंग में देश की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता सामने आई। युवा खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन भविष्य की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए भी उत्साहजनक संकेत माना जा रहा है।