डिजिटल OPD पंजीकरण ने पकड़ी रफ्तार, आयुष्मान भारत मिशन का बड़ा पड़ाव

डिजिटल OPD पंजीकरण ने पकड़ी रफ्तार, आयुष्मान भारत मिशन का बड़ा पड़ाव

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत QR-कोड आधारित ‘स्कैन एंड रजिस्टर’ सेवा ने 7 अगस्त 2026 तक 25 करोड़ डिजिटल ओपीडी पंजीकरण का आंकड़ा पार कर लिया। यह उपलब्धि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा संकेत है, क्योंकि अब मरीजों को पंजीकरण और प्रोफाइल साझा करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और व्यवस्थित मिल रही है।

डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे में अहम कदम

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार यह सेवा देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 756 जिलों में 30,800 स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है। इनमें 24,323 सरकारी और 6,481 निजी संस्थान शामिल हैं। इस व्यापक पहुंच से स्पष्ट है कि डिजिटल ओपीडी पंजीकरण अब केवल कुछ बड़े अस्पतालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिला स्तर तक इसकी उपस्थिति बन चुकी है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य एक ऐसा राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा तैयार करना है, जिसमें स्वास्थ्य पहचान, रिकॉर्ड साझा करने और विभिन्न संस्थानों के बीच डेटा के सुरक्षित आदान-प्रदान की सुविधा हो। इसी ढांचे के भीतर ABHA और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं काम करती हैं।

स्कैन एंड रजिस्टर सेवा कैसे बदल रही है प्रक्रिया

‘स्कैन एंड रजिस्टर’ सेवा की शुरुआत अक्टूबर 2022 में ‘स्कैन एंड शेयर’ के रूप में हुई थी। बाद में इसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत और व्यापक बनाया गया। इस सेवा में मरीज QR कोड स्कैन करके अपनी ABHA प्रोफाइल साझा कर सकता है और ओपीडी पंजीकरण डिजिटल तरीके से पूरा कर सकता है। इससे कतार में लगने का समय घटता है और अस्पतालों में भीड़ प्रबंधन आसान होता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, रोज़ाना लगभग 4 लाख मरीज इस सेवा का उपयोग कर रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं अब व्यवहारिक स्तर पर लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनती जा रही हैं।

राज्यों और संस्थानों में उपयोग का पैटर्न

राज्यवार आंकड़ों में बिहार सबसे आगे रहा, जहां 7.30 करोड़ से अधिक स्कैन एंड रजिस्टर लेनदेन दर्ज किए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 4.09 करोड़, आंध्र प्रदेश में 3.38 करोड़ और जम्मू-कश्मीर में 1.39 करोड़ लेनदेन हुए। बड़े संस्थानों में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है।

AIIMS नई दिल्ली में 54.29 लाख से अधिक डिजिटल ओपीडी पंजीकरण दर्ज किए गए। AIIMS भोपाल में 29.10 लाख, AIIMS भुवनेश्वर में 23.93 लाख, AIIMS पटना में 19.62 लाख और AIIMS रायपुर में 18.63 लाख पंजीकरण हुए। ये आंकड़े दिखाते हैं कि केंद्रीय संस्थानों ने डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ABHA का पूरा नाम Ayushman Bharat Health Account है और यह ABDM के तहत डिजिटल स्वास्थ्य पहचान के रूप में काम करता है।
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत 2021 में हुई थी।
  • ‘स्कैन एंड रजिस्टर’ सेवा की शुरुआत अक्टूबर 2022 में ‘स्कैन एंड शेयर’ नाम से हुई थी।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण भारत में आयुष्मान भारत योजनाओं और डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे के क्रियान्वयन की प्रमुख संस्था है।

25 करोड़ डिजिटल ओपीडी पंजीकरण का यह पड़ाव बताता है कि भारत का स्वास्थ्य तंत्र तेजी से कागज-आधारित व्यवस्था से डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में इससे मरीजों की सुविधा, रिकॉर्ड प्रबंधन और अस्पतालों की कार्यकुशलता, तीनों में सुधार की संभावना और मजबूत होती दिखती है।

Originally written on August 8, 2026 and last modified on August 8, 2026.

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