डिजिटल अरेस्ट ठगी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सख्त रुख अपनाते हुए देशभर में कार्रवाई मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने ऐसे मामलों में फर्जी दस्तावेज, नकली वारंट और पहचान की नकल के जरिए की जा रही ठगी को गंभीर साइबर अपराध मानते हुए राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को समन्वित कदम उठाने को कहा है।
डिजिटल अरेस्ट ठगी कैसे होती है
डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें ठग खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या अदालत का अधिकारी बताकर फोन, वीडियो कॉल या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पीड़ित को डराते हैं। वे गिरफ्तारी, हिरासत या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पैसे, निजी जानकारी या बैंक खाते तक पहुंच मांगते हैं। कई मामलों में फर्जी दस्तावेज और नकली आदेश दिखाकर भरोसा पैदा किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दायरा
4 अगस्त 2026 को दिए गए निर्देश एक suo motu मामले में आए, जिसका शीर्षक था In Re: Victims of Digital Arrest Related to Forged Documents। यह मामला अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था। अदालत ने आरबीआई को म्यूल अकाउंट्स और साइबर-समर्थित धोखाधड़ी से जुड़े खातों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP बनाने को कहा है। इसमें शिकायत निवारण व्यवस्था, धन वापसी का मॉड्यूल और जन-जागरूकता उपाय शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से कहा है कि वह यह SOP चार सप्ताह के भीतर जारी करे। साथ ही राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को गृह मंत्रालय की 2 जनवरी 2026 की SOP के तहत शिकायत निवारण मॉड्यूल और मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल को सक्रिय रूप से लागू करने को कहा गया है। उन्हें चार सप्ताह के भीतर राज्य साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर को भी अधिसूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
साइबर फ्रॉड रोकने के लिए नई व्यवस्था
अदालत ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के साथ परामर्श कर e-Zero FIR व्यवस्था अपनाने को भी कहा है। इसका उद्देश्य साइबर अपराध की शिकायतों पर तेज और एकीकृत कार्रवाई सुनिश्चित करना है। डिजिटल ठगी के मामलों में अक्सर देरी, अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और धन की त्वरित निकासी बड़ी चुनौती बनती है। ऐसे में शिकायत दर्ज होने से लेकर रकम रोकने और वापस दिलाने तक की प्रक्रिया को तेज करना इस दिशा में अहम माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भारत में साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराने का केंद्रीय मंच है।
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है।
- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बैंकिंग व्यवस्था का नियमन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के तहत करता है।
- suo motu का अर्थ है, अदालत द्वारा अपने आप संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू करना।
मामले के आंकड़े और आगे की सुनवाई
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी शिकायतें 2024 में 1,23,672 थीं, जो 2025 में घटकर 58,249 रह गईं और 30 जून 2026 तक 16,377 दर्ज की गईं। अब तक मौजूदा तंत्र के जरिए 36,290 मामलों में लगभग 18.05 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस कराए जा चुके हैं। मामला 16 सितंबर 2026 को फिर सुना जाएगा, जब एक नई समेकित स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।यह फैसला डिजिटल ठगी के खिलाफ संस्थागत जवाबदेही, त्वरित शिकायत निवारण और धन वापसी की प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।