टिमोर ग्रीन पिजन विलुप्ति के कगार पर
टिमोर द्वीप और उसके आसपास के कुछ द्वीपों में पाए जाने वाले दुर्लभ पक्षी टिमोर ग्रीन पिजन की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई है। मई २०२६ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार इस पक्षी की वैश्विक आबादी अब केवल लगभग १०० से ५०० के बीच रह गई है। शोधकर्ताओं ने इसे अत्यधिक संकटग्रस्त श्रेणी में रखने की सिफारिश की है। यह अध्ययन २००२ से २०२५ के बीच लगभग १,४०० दिनों तक किए गए फील्डवर्क पर आधारित है।
प्रजाति और वितरण
टिमोर ग्रीन पिजन का वैज्ञानिक नाम ट्रेरोन सिट्टासियस है। यह ट्रेरोन वंश का पक्षी है, जिसमें एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पाए जाने वाले कई हरे कबूतर शामिल हैं। यह प्रजाति मुख्य रूप से तिमोर-लेस्ते में पाई जाती है और इसके अधिकतर रिकॉर्ड लाउतेम जिले तथा नीनो कोनिस सैंटाना नेशनल पार्क से जुड़े हैं। यह पक्षी रोटे, सेमाउ, अटाउरो और जाको जैसे निकटवर्ती द्वीपों पर भी सीमित संख्या में देखा गया है।
जनसंख्या में गिरावट और खतरे
पहले इस पक्षी की संख्या लगभग २,००० तक मानी जाती थी, लेकिन हालिया अध्ययन में आबादी में भारी गिरावट दर्ज की गई। इंडोनेशिया के पश्चिमी तिमोर क्षेत्र में २००५ के बाद इस पक्षी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, जिसके कारण वहां इसे कार्यात्मक रूप से विलुप्त माना जा रहा है। शिकार इसके लिए सबसे बड़ा खतरा है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर इसका मांस उपयोग किया जाता है। इसके अलावा वनों की कटाई और भूमि उपयोग परिवर्तन से इसका प्राकृतिक आवास भी तेजी से नष्ट हो रहा है।
आईयूसीएन स्थिति और संरक्षण प्रयास
वर्तमान में टिमोर ग्रीन पिजन को आईयूसीएन रेड लिस्ट में ‘एंडेंजर्ड’ यानी संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। हालांकि चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय और बर्डलाइफ इंटरनेशनल के शोधकर्ताओं ने इसे ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ श्रेणी में रखने का प्रस्ताव दिया है। यह श्रेणी उन प्रजातियों के लिए होती है जिनके जंगली अवस्था में विलुप्त होने का खतरा अत्यधिक अधिक होता है।
अनुसंधान और फील्ड सर्वेक्षण
यह अध्ययन कई वर्षों तक किए गए व्यापक सर्वेक्षणों और प्रत्यक्ष अवलोकनों पर आधारित था। शोध का नेतृत्व चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय के डॉ. कॉलिन ट्रेनर ने किया, जबकि बर्डलाइफ इंटरनेशनल के एलेक्स बेरीमैन भी इस अध्ययन से जुड़े रहे। अध्ययन में तिमोर और आसपास के द्वीपों में बार-बार सर्वेक्षण कर पक्षियों की संख्या और वितरण का आकलन किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” टिमोर ग्रीन पिजन का वैज्ञानिक नाम ट्रेरोन सिट्टासियस है। ” यह पक्षी तिमोर द्वीप और लेसर सुंडा क्षेत्र के कुछ निकटवर्ती द्वीपों का स्थानिक पक्षी है। ” आईयूसीएन रेड लिस्ट में ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ श्रेणी विलुप्ति के अत्यधिक खतरे वाली प्रजातियों के लिए उपयोग होती है। ” नीनो कोनिस सैंटाना नेशनल पार्क तिमोर-लेस्ते के लाउतेम जिले में स्थित है। टिमोर ग्रीन पिजन की तेजी से घटती आबादी जैव विविधता संरक्षण के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिकार और आवास विनाश पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह दुर्लभ पक्षी निकट भविष्य में पूरी तरह विलुप्त हो सकता है।