झारखंड में मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से माओवादी नेतृत्व को बड़ा झटका

झारखंड में मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से माओवादी नेतृत्व को बड़ा झटका

झारखंड के धनबाद-गिरिडीह सीमा क्षेत्र के मनियाडीह इलाके में 29 जुलाई 2026 को प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ सदस्य मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता दी है। करीब दो दशक से फरार चल रहे बेसरा संगठन के अंतिम सक्रिय पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति सदस्य बताए जा रहे थे। उन पर झारखंड और ओडिशा समेत कई राज्यों में कुल मिलाकर भारी इनाम घोषित था।

कौन थे मिसिर बेसरा और क्यों थे अहम

मिसिर बेसरा माओवादी संगठन के उन पुराने चेहरों में शामिल थे, जिन्होंने 1980 के दशक के मध्य में आंदोलन से जुड़कर झारखंड क्षेत्र में संगठनात्मक और सशस्त्र ढांचे को मजबूत करने में भूमिका निभाई। वे अलग-अलग नामों से भी जाने जाते थे, जिनमें सुनिर्मल, भास्कर और सागर शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वे रेड कॉरिडोर में संगठनात्मक समन्वय से जुड़े रहे, यानी उन इलाकों में जहां वामपंथी उग्रवाद का प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है।

संयुक्त अभियान में हुई गिरफ्तारी

बेसरा की गिरफ्तारी इंटेलिजेंस ब्यूरो, झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियान में हुई। उनके साथ चार सहयोगियों को भी पकड़ा गया, जिनमें रीजनल कमेटी के सदस्य तुम्बा मांझी और बिरेन हांसदा शामिल हैं। इन दोनों पर 15-15 लाख रुपये का इनाम था। झारखंड सरकार ने बेसरा पर 1 करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था।

माओवादी संगठन पर असर और पुराना आपराधिक रिकॉर्ड

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, बेसरा की गिरफ्तारी से सीपीआई (माओवादी) की सक्रिय शीर्ष नेतृत्व संरचना को बड़ा झटका लगा है। यह संगठन भारत में प्रतिबंधित वामपंथी उग्रवादी संगठन है, जिसकी रणनीति, कैडर तैनाती और सशस्त्र गतिविधियों का संचालन पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति जैसे शीर्ष निकायों के जरिए होता है। बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या और आईईडी विस्फोट जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सीपीआई (माओवादी) का गठन 2004 में भारत के प्रमुख माओवादी गुटों के विलय से हुआ था।
  • सीआरपीएफ केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है।
  • झारखंड जगुआर झारखंड पुलिस की विशेष एंटी-नक्सल इकाई है।
  • रेड कॉरिडोर उन क्षेत्रों को कहा जाता है जो मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे हैं।

मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे लंबे समय से फरार थे और संगठन के शीर्ष ढांचे में अंतिम सक्रिय चेहरों में गिने जा रहे थे। इससे झारखंड और आसपास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई को नई मजबूती मिली है।

Originally written on July 29, 2026 and last modified on July 29, 2026.

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