झारखंड ने प्राथमिक स्तर पर हासिल की शून्य ड्रॉपआउट दर

झारखंड ने प्राथमिक स्तर पर हासिल की शून्य ड्रॉपआउट दर

झारखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2024-25 में प्राथमिक स्तर पर शून्य ड्रॉपआउट दर दर्ज की है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस और 8 मई 2026 को जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 2014-15 में प्राथमिक ड्रॉपआउट दर 6.41 प्रतिशत थी, जो अब घटकर शून्य हो गई है। यह उपलब्धि राज्य की शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों को स्कूलों में बनाए रखने के प्रयासों को दर्शाती है।

ड्रॉपआउट दर और शिक्षा स्तर

ड्रॉपआउट दर का अर्थ उन विद्यार्थियों के अनुपात से है जो किसी शिक्षा स्तर को पूरा करने से पहले स्कूल छोड़ देते हैं। भारत में प्राथमिक शिक्षा में कक्षा 1 से 5, उच्च प्राथमिक में कक्षा 6 से 8 और माध्यमिक स्तर में कक्षा 9 से 10 शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में उच्च प्राथमिक ड्रॉपआउट दर 7.42 प्रतिशत से घटकर 1.7 प्रतिशत हो गई, जबकि माध्यमिक स्तर पर यह 23.2 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत रह गई।

यूडीआईएसई+ और शिक्षा आंकड़े

यूडीआईएसई+ भारत का राष्ट्रीय स्कूल शिक्षा डेटाबेस है, जिसका उपयोग नामांकन, शिक्षकों, स्कूल ढांचे और ड्रॉपआउट दर जैसे संकेतकों के लिए किया जाता है। 2024-25 के आंकड़ों में झारखंड ने लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए प्राथमिक स्तर पर शून्य ड्रॉपआउट दर्ज किया। इससे पहले 2022-23 में यह दर 11 प्रतिशत से अधिक थी।

सकल नामांकन अनुपात में बदलाव

सकल नामांकन अनुपात यानी जीईआर किसी शिक्षा स्तर पर कुल नामांकन को उस स्तर की आधिकारिक आयु वर्ग की जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में दर्शाता है। झारखंड का प्राथमिक जीईआर 2014-15 में 109.2 प्रतिशत था, जो 2024-25 में घटकर 92.5 प्रतिशत हो गया। वहीं माध्यमिक स्तर का जीईआर 66.05 प्रतिशत से बढ़कर 72 प्रतिशत पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, जीईआर 100 प्रतिशत से अधिक भी हो सकता है यदि आधिकारिक आयु वर्ग से बाहर के विद्यार्थी भी उस स्तर पर अध्ययन कर रहे हों।

चुनौतियां अभी भी बाकी

हालांकि ड्रॉपआउट दर में बड़ी कमी आई है, लेकिन राज्य में शिक्षा क्षेत्र की कई चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। सितंबर 2023 तक लगभग 86 हजार बच्चे स्कूल से बाहर थे। राज्य सरकार ने 15 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 तक घर-घर सर्वेक्षण की योजना बनाई थी ताकि स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ा जा सके। इसके अलावा 2025-26 में राज्य में लगभग 99,565 शिक्षकों के पद खाली थे, जिनमें 80,341 पद प्राथमिक स्तर से जुड़े थे। राज्य में 9,172 स्कूल ऐसे भी थे जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूडीआईएसई+ का पूरा नाम यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस है।
  • नीति आयोग की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी।
  • भारत में प्राथमिक शिक्षा सामान्यतः कक्षा 1 से 5 तक मानी जाती है।
  • सकल नामांकन अनुपात शिक्षा में भागीदारी मापने का महत्वपूर्ण संकेतक है।

झारखंड की यह उपलब्धि शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि शिक्षकों की कमी और स्कूल से बाहर बच्चों जैसी चुनौतियों पर लगातार काम करना राज्य के लिए आगे भी आवश्यक रहेगा।

Originally written on May 11, 2026 and last modified on May 11, 2026.

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