जैव विविधता से कमाई का बंटवारा, NBA ने ABS के तहत जारी किए ₹3.79 करोड़

जैव विविधता से कमाई का बंटवारा, NBA ने ABS के तहत जारी किए ₹3.79 करोड़

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने 9 अगस्त 2026 को एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) व्यवस्था के तहत करीब ₹3.79 करोड़ जारी किए। यह राशि राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों, आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो और हिसार बोवाइन सीमेन स्टेशन एवं अनुसंधान केंद्र सहित 33 संस्थाओं को दी गई। यह कदम जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से मिलने वाले लाभ को साझा करने की भारत की व्यवस्था को और मजबूत करता है।

ABS व्यवस्था क्यों महत्वपूर्ण है

ABS, जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत बनाया गया एक ढांचा है, जिसके जरिए जैविक संसाधनों और उनसे जुड़ी पारंपरिक जानकारी के उपयोग से होने वाले लाभ साझा किए जाते हैं। भारत में NBA इस पूरी व्यवस्था का शीर्ष वैधानिक निकाय है। इसका काम जैविक संसाधनों तक पहुंच को विनियमित करना और जैव विविधता संरक्षण पर केंद्र सरकार को सलाह देना है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शुल्क वसूलना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जिन स्थानीय समुदायों, संस्थाओं और क्षेत्रों से संसाधन लिए जाते हैं, उन्हें भी उसका लाभ मिले। यही कारण है कि ABS भुगतान राज्य, जिला और स्थानीय स्तर की जैव विविधता संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है।

किन स्रोतों से आई यह राशि

इस बार ABS फंड कई कंपनियों से प्राप्त हुए, जिनमें Bayer Science and Innovation Pvt Ltd, HM Clause India Pvt Ltd और Advanta Enterprises Limited शामिल हैं। इन कंपनियों ने सब्जियों और तिलहन से जुड़े आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग के लिए भुगतान किया। इसके अलावा श्रीलंका के पशुपालन एवं स्वास्थ्य विभाग से साहीवाल गाय के सीमेन के उपयोग के लिए भी ABS भुगतान मिला।

यह व्यवस्था दिखाती है कि जैविक संसाधन केवल घरेलू कृषि या अनुसंधान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इनकी मांग रहती है। ऐसे में लाभ-साझेदारी का ढांचा संसाधनों के संरक्षण और न्यायसंगत उपयोग दोनों के लिए जरूरी हो जाता है।

राज्यों और संस्थाओं को कितना मिला

टमाटर आनुवंशिक संसाधनों से ₹86.56 लाख की राशि 31 स्थानीय बोर्डों के लिए जुटाई गई, जबकि मिर्च संसाधनों से ₹83.76 लाख 32 बोर्डों के लिए प्राप्त हुए। राज्यवार आवंटन में मध्य प्रदेश को ₹46.93 लाख, पश्चिम बंगाल को ₹44.76 लाख और ओडिशा को ₹44.08 लाख मिले।

इन निधियों का उपयोग लोगों की जैव विविधता पंजीकाओं को अद्यतन करने, स्थानीय संरक्षण कार्यों को समर्थन देने और जैव विविधता धरोहर स्थलों को मजबूत करने में किया जाना है। इससे स्थानीय स्तर पर जैविक संसाधनों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण बेहतर हो सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी।
  • People’s Biodiversity Registers स्थानीय स्तर पर जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का रिकॉर्ड रखते हैं।
  • Biodiversity Heritage Sites वे क्षेत्र होते हैं जिन्हें विशिष्ट, संवेदनशील या सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण जैव विविधता के लिए अधिसूचित किया जाता है।
  • नवीनतम हस्तांतरण के बाद NBA की कुल ABS राशि ₹166 करोड़ से अधिक हो गई है।

यह ताज़ा आवंटन बताता है कि भारत में जैव विविधता संरक्षण अब केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि संसाधनों के उपयोग से जुड़े आर्थिक लाभों के न्यायसंगत वितरण की भी व्यवस्था बन चुका है।

Originally written on August 10, 2026 and last modified on August 10, 2026.

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