जीआई उत्पादों को बड़ा बाजार दिलाने के लिए एमएसएमई और डीपीआईआईटी की साझेदारी

जीआई उत्पादों को बड़ा बाजार दिलाने के लिए एमएसएमई और डीपीआईआईटी की साझेदारी

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य भौगोलिक संकेतक (GI) वाले उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना, उनकी ब्रांड पहचान मजबूत करना और उत्पादक समूहों को डिजिटल व संस्थागत समर्थन देना है।

जीआई उत्पादों के लिए नई बाजार रणनीति

यह समझौता एमएसएमई मंत्रालय की उद्यम सहायता प्रणालियों को डीपीआईआईटी के कानूनी और प्रशासनिक ढांचे से जोड़ता है। इससे जीआई उत्पादों से जुड़े कारीगरों, उत्पादक समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को संगठित तरीके से बाजार तक पहुंच मिल सकेगी। सरकार का फोकस केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादों की बिक्री, ब्रांडिंग, गुणवत्ता और मूल्य संवर्धन पर भी है।

भौगोलिक संकेतक ऐसे उत्पादों पर लगाए जाते हैं जिनकी विशेषता, प्रतिष्ठा या गुणवत्ता किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। भारत में जीआई पंजीकरण और संरक्षण का आधार Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 है। डीपीआईआईटी इस व्यवस्था के लिए नोडल विभाग की भूमिका निभाता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा स्थानीय उत्पादों का बाजार

समझौते के तहत जीआई कलेक्टिव्स और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर “भारत जीआई” ब्रांड के तहत जोड़ा जाएगा। इससे पारंपरिक और क्षेत्रीय उत्पादों को डिजिटल खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

ONDC एक खुला डिजिटल वाणिज्य नेटवर्क है, जबकि GeM केंद्र सरकार का सार्वजनिक खरीद मंच है, जहां सरकारी खरीदार और विक्रेता वस्तुओं व सेवाओं के लिए लेनदेन करते हैं। इस साझेदारी से छोटे उत्पादकों को बड़े संस्थागत बाजारों में प्रवेश का रास्ता मिल सकता है।

ओडीओपी, गुणवत्ता और प्रदर्शनी पर भी जोर

इस ढांचे में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) इकोसिस्टम को भी कार्यक्रमों और हस्तक्षेपों में शामिल किया जाएगा। ODOP जिला-स्तरीय उत्पाद संवर्धन का एक ढांचा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय विनिर्माण, कारीगर समूहों और पारंपरिक क्षेत्रों में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है।

दोनों विभाग भारत और विदेश में व्यापार मेलों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और प्रदर्शनियों में संयुक्त रूप से जीआई पवेलियन भी लगाएंगे। साथ ही, गुणवत्ता मानकीकरण, क्षमता निर्माण और डिजिटल सशक्तिकरण पर भी काम किया जाएगा, ताकि उत्पाद केवल पहचान तक सीमित न रहें, बल्कि प्रतिस्पर्धी बाजार में टिक भी सकें।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी खासियत किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है।
  • भारत में जीआई संरक्षण Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999 के तहत होता है।
  • दार्जिलिंग चाय और कांचीपुरम सिल्क साड़ी जीआई टैग के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
  • GeM सरकारी खरीद का मंच है, जबकि ONDC इंटरऑपरेबल डिजिटल कॉमर्स नेटवर्क के रूप में काम करता है।

यह समझौता स्थानीय उत्पादों को पहचान से आगे बढ़ाकर बाजार, डिजिटल पहुंच और संस्थागत खरीद से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पारंपरिक कारीगरों और उत्पादक समूहों के लिए नए अवसर बनने की उम्मीद है।

Originally written on August 11, 2026 and last modified on August 11, 2026.

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