जिनेवा में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का नया प्रतीक

जिनेवा में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का नया प्रतीक

भारत ने 7 अगस्त 2026 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को पांच युवा मोर भेंट किए। यह औपचारिक हस्तांतरण भारत के जिनेवा स्थित राजदूत और संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची तथा यूएन जिनेवा की महानिदेशक तातियाना वलोवाया के बीच रिबन-कटिंग समारोह के दौरान हुआ। यह कदम केवल एक उपहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच एक प्रतीकात्मक सेतु भी माना जा रहा है।

कौन से मोर दिए गए और उनकी खासियत क्या है

भेंट किए गए पांच मोरों में चार नीले भारतीय मोर और एक दुर्लभ सफेद नर मोर शामिल है। भारतीय मोर का वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus है और यह भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। सफेद पंखों वाला मोर इसी प्रजाति का रंग-रूपांतर है, जिसे कुछ चिड़ियाघरों और बंदी प्रजनन केंद्रों में देखा जाता है।

इन पक्षियों को जिनेवा के एरियाना पार्क में बने अस्थायी एवियरी में तीन महीने तक रखा जाएगा। इसके बाद उन्हें यूएन जिनेवा परिसर में खुलकर विचरण करने दिया जाएगा। यह परिसर लगभग 46 हेक्टेयर में फैला है और इसमें पैले दे नासियोन भी शामिल है।

यूएन जिनेवा परिसर में मोरों की पुरानी परंपरा

जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र परिसर में मोरों को रखने की परंपरा नई नहीं है। यह 1981 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली चिड़ियाघर से मोरों का एक प्रजनन जोड़ा यूएन जिनेवा को भेजा था। तब से यह परंपरा भारत और संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बीच एक विशिष्ट सांस्कृतिक संबंध का प्रतीक बनी रही है।

यूएन जिनेवा के परिसर में पक्षियों की उपस्थिति लंबे समय से रही है, और मोर वहां की जीवंत पहचान का हिस्सा माने जाते हैं। इस बार भी उम्मीद है कि अस्थायी एवियरी से बाहर आने के बाद ये मोर परिसर के स्थायी जीव-जंतुओं के संग्रह का हिस्सा बन जाएंगे।

परिवहन, देखभाल और प्रतीकात्मक महत्व

इन मोरों के परिवहन और चिकित्सकीय देखभाल की जिम्मेदारी जिनेवा बायोपार्क ने संभाली। इसके लिए विशेष रूप से संशोधित पशु-एम्बुलेंस का उपयोग किया गया। यह व्यवस्था इस बात को दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पशु-स्थानांतरण केवल औपचारिक उपहार नहीं होता, बल्कि उसमें स्वास्थ्य, सुरक्षा और संरक्षण के मानक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

यूएन जिनेवा अधिकारियों ने इन पांच मोरों के लिए सार्वजनिक नामकरण प्रतियोगिता की भी योजना बनाई है। इससे यह उपहार केवल राजनयिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए भी आकर्षण का विषय बनेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • संयुक्त राष्ट्र के चार प्रमुख कार्यालयों में जिनेवा, न्यूयॉर्क, वियना और नैरोबी शामिल हैं।
  • भारतीय मोर Pavo cristatus भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
  • सफेद मोर उसी प्रजाति का रंग-रूपांतर है, जो आमतौर पर बंदी अवस्था में देखा जाता है।
  • यूएन जिनेवा परिसर लगभग 46 हेक्टेयर में फैला है और इसमें पैले दे नासियोन स्थित है।

भारत द्वारा मोरों का यह उपहार सांस्कृतिक प्रतीक, कूटनीतिक सौहार्द और प्रकृति-आधारित विरासत—तीनों को एक साथ जोड़ता है। जिनेवा में यह पहल भारत की पहचान को एक नए और सजीव रूप में सामने लाती है।

Originally written on August 10, 2026 and last modified on August 10, 2026.

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