छत्तीसगढ़ में भारतनेट विस्तार से ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार
डिजिटल भारत निधि ने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के संचार भवन में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ अमेडेड भारतनेट कार्यक्रम के तहत एक समझौता किया। यह करार राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल पर आधारित है, जिसके जरिए ग्रामीण इलाकों तक उच्च गति ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचाने की योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल में क्या बदलेगा
भारतनेट देश का प्रमुख ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है। संशोधित मॉडल में नेटवर्क विस्तार और उससे जुड़ा बुनियादी ढांचा राज्य सरकार और नामित एजेंसियों के माध्यम से लागू किया जाएगा। इससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार परियोजना क्रियान्वयन में अधिक लचीलापन मिलने की उम्मीद है।
इस समझौते में डिजिटल भारत निधि, छत्तीसगढ़ सरकार, छत्तीसगढ़ स्टेट भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, भारत संचार निगम लिमिटेड और छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में परियोजना का दायरा
छत्तीसगढ़ में यह परियोजना कुल 11,682 ग्राम पंचायतों को कवर करेगी। इसमें 4,048 फेज-1 ग्राम पंचायतों को लीनियर टोपोलॉजी से रिंग टोपोलॉजी में अपग्रेड किया जाएगा, 5,964 फेज-2 ग्राम पंचायतें शामिल हैं और 1,670 नई बनी ग्राम पंचायतें भी इस दायरे में आएंगी।
इसके अलावा, राज्य के 8,328 गांवों में मांग के आधार पर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने का प्रावधान भी किया गया है। नेटवर्क विस्तार में ऑप्टिकल फाइबर आधारित ढांचे का उपयोग होगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में तेज और स्थिर कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
ग्रामीण सेवाओं पर असर
इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में तीन लाख से अधिक ग्रामीण होम फाइबर कनेक्शन को समर्थन मिलने की संभावना जताई गई है। इससे टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन शिक्षा जैसी सेवाओं की पहुंच बढ़ सकती है। ग्रामीण भारत में डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ाने के लिहाज से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डिजिटल भारत निधि, दूरसंचार विभाग के अधीन कार्य करती है।
- भारतनेट भारत का राष्ट्रीय ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी कार्यक्रम है।
- रिंग टोपोलॉजी नेटवर्क डिजाइन का वह रूप है, जिसमें नोड्स एक बंद घेरा बनाते हैं।
- ग्राम पंचायत ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की सबसे बुनियादी इकाई है।
छत्तीसगढ़ में भारतनेट का यह विस्तार ग्रामीण डिजिटल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे दूर-दराज के गांवों में इंटरनेट आधारित सेवाओं की पहुंच और उपयोगिता दोनों बढ़ने की संभावना है।