चंदननगर के जलभरा संदेश को मिला जीआई टैग

चंदननगर के जलभरा संदेश को मिला जीआई टैग

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के चंदननगर की प्रसिद्ध मिठाई जलभरा संदेश (जलभरा) को 26 जून 2026 को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया। लगभग 220 वर्षों से अधिक पुरानी इस पारंपरिक बंगाली मिठाई को अब आधिकारिक रूप से उसकी क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत के लिए मान्यता मिल गई है। जीआई टैग मिलने से इस अनूठी मिठाई की मौलिकता सुरक्षित रहेगी और चंदननगर की मिठाई परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

जीआई टैग क्या होता है?

भौगोलिक संकेत (Geographical Indication-GI) ऐसा चिन्ह होता है, जो किसी उत्पाद की विशेष गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशिष्टता को उसके भौगोलिक क्षेत्र से जोड़ता है। भारत में जीआई पंजीकरण भौगोलिक संकेत वस्तु (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत किया जाता है। इसका पंजीकरण चेन्नई स्थित जीआई रजिस्ट्री द्वारा किया जाता है। जीआई टैग कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों, हस्तशिल्प और निर्मित वस्तुओं को प्रदान किया जाता है।

जलभरा संदेश की विशेषताएँ

जलभरा संदेश अपनी अनोखी बनावट और स्वाद के कारण अन्य मिठाइयों से अलग पहचान रखता है। इसका बाहरी भाग मुलायम छेना से तैयार किया जाता है, जबकि अंदर तरल भराव होता है। इस भराव में पारंपरिक रूप से गुलाब का शरबत या नोलेन गुड़ (खजूर के गुड़ का रस) इस्तेमाल किया जाता है। मिठाई को काटते या खाते समय भीतर से निकलने वाला मीठा तरल इसका सबसे आकर्षक गुण माना जाता है। यही विशेषता इसे बंगाल की सबसे अनूठी पारंपरिक मिठाइयों में शामिल करती है।

इतिहास और उत्पत्ति

जलभरा संदेश का संबंध चंदननगर के तेलिनीपाड़ा क्षेत्र से माना जाता है। इसका आविष्कार लगभग 1843–44 के दौरान प्रसिद्ध मिठाई निर्माता सूर्य मोदक और उनके पुत्र सिद्धेश्वर मोदक द्वारा किया गया था। समय के साथ यह मिठाई पूरे बंगाल में लोकप्रिय हो गई, लेकिन इसकी मूल पहचान चंदननगर से ही जुड़ी रही। इसी ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सितंबर 2022 में इसके लिए जीआई टैग का आवेदन किया गया था, जिसे जून 2026 में स्वीकृति मिली।

जीआई टैग से मिलने वाले लाभ

जीआई टैग मिलने के बाद केवल चंदननगर में पारंपरिक विधि से तैयार की गई मिठाई को ही जलभरा नाम से बाजार में बेचा जा सकेगा। इससे उत्पाद की गुणवत्ता और प्रामाणिकता बनी रहेगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी तथा स्थानीय कारीगरों और मिठाई निर्माताओं को आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही, यह मान्यता चंदननगर की सांस्कृतिक और पाक विरासत को भी मजबूत करेगी तथा भविष्य में निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा देगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में दार्जिलिंग चाय जीआई टैग प्राप्त करने वाले शुरुआती भारतीय उत्पादों में शामिल है।
  • भारत 1995 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सदस्य बना और जीआई संरक्षण बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
  • छेना बंगाली मिठाइयों जैसे संदेश और रसगुल्ले का प्रमुख आधार होता है।
  • जीआई टैग उत्पाद की क्षेत्रीय पहचान की रक्षा करता है और पारंपरिक उत्पादों को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।

जलभरा संदेश को जीआई टैग मिलना केवल एक मिठाई को मिली मान्यता नहीं, बल्कि चंदननगर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक मिठाई निर्माण कला और स्थानीय कारीगरों के वर्षों के योगदान का सम्मान भी है। यह उपलब्धि भारत की क्षेत्रीय खाद्य परंपराओं के संरक्षण और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Originally written on July 4, 2026 and last modified on July 4, 2026.

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