गुजरात और तमिलनाडु में बनेंगी अंतरिक्ष तकनीकी सुविधाएं
भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने 22 मई 2026 को गुजरात और तमिलनाडु में कॉमन टेक्निकल फैसिलिटीज स्थापित करने को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत के निजी क्षेत्र आधारित अंतरिक्ष निर्माण उद्योग को मजबूत करना और आधुनिक परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन केंद्रों के विकास में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
क्या हैं कॉमन टेक्निकल फैसिलिटीज
कॉमन टेक्निकल फैसिलिटीज साझा इंजीनियरिंग केंद्र होते हैं, जहां अंतरिक्ष हार्डवेयर की परीक्षण, सत्यापन और एकीकरण संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इनका उपयोग स्टार्टअप कंपनियों और बड़े उद्योगों द्वारा किया जाएगा, जिन्हें रॉकेट और उपग्रहों से जुड़े महंगे परीक्षण उपकरणों की आवश्यकता होती है। इससे निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रवेश आसान होगा।
गुजरात में बनेगा स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क
गुजरात के अहमदाबाद के निकट खोराज में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र अंतरिक्ष यान और जटिल पेलोड प्रणालियों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। यहां संरचनात्मक असेंबली और इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन जैसे कार्य किए जाएंगे। पेलोड उन उपकरणों या यंत्रों को कहा जाता है जिन्हें किसी मिशन के लिए अंतरिक्ष यान या प्रक्षेपण वाहन में लगाया जाता है।
तमिलनाडु में बनेगा स्पेस व्हीकल क्लस्टर
तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्पेस व्हीकल क्लस्टर विकसित किया जाएगा। यह स्थान कुलसेकरपट्टनम में प्रस्तावित छोटे प्रक्षेपण वाहन लॉन्च कॉम्प्लेक्स के पास स्थित है। यहां पूर्ण प्रक्षेपण वाहन प्रणालियों के निर्माण, परीक्षण और एकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह केंद्र भारत के उभरते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
आईएन-स्पेस की भूमिका
आईएन-स्पेस यानी भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र इन सुविधाओं की तकनीकी प्रणालियों की खरीद, स्थापना और प्रारंभिक संचालन करेगा। बाद में इन परिसंपत्तियों का स्वामित्व संबंधित राज्य सरकारों को सौंप दिया जाएगा। यह मॉडल केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से अंतरिक्ष विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने का उदाहरण माना जा रहा है।
सरकारी सहयोग और निवेश
केंद्र सरकार ने तूतीकोरिन स्थित विशेष सुविधा के लिए ₹100 करोड़ की मंजूरी दी है। वहीं राज्य सरकारें भूमि, भवन और अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” आईएन-स्पेस का पूरा नाम भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र है। ” कॉमन टेक्निकल फैसिलिटीज साझा परीक्षण और सत्यापन अवसंरचना प्रदान करती हैं। ” तूतीकोरिन की सुविधा के लिए केंद्र सरकार ने ₹100 करोड़ स्वीकृत किए हैं। ” राज्य सरकारें इन परियोजनाओं के लिए भूमि और आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराएंगी। गुजरात और तमिलनाडु में स्थापित होने वाली ये नई तकनीकी सुविधाएं भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को नई गति देंगी। इससे देश में अंतरिक्ष निर्माण, परीक्षण और प्रक्षेपण क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की भागीदारी भी बढ़ेगी।