क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत का फोकस: आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
भारत ने महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री G Kishan Reddy ने हाल ही में 46 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी और सातवें चरण में 19 नए ब्लॉकों की पेशकश की घोषणा की। यह पहल देश की आयात निर्भरता कम करने और आर्थिक मजबूती बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
खनिज नीलामी का विस्तार
सरकार अब तक छह चरणों में कुल 46 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर चुकी है। सातवें चरण में 19 नए ब्लॉकों को शामिल किया गया है, जिससे घरेलू खनन और अन्वेषण को बढ़ावा मिलेगा। ये खनिज ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिससे भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूती मिलेगी।
क्रिटिकल मिनरल्स का रणनीतिक महत्व
लिथियम, कोबाल्ट, वैनाडियम और टाइटेनियम जैसे खनिज आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी तकनीक, सौर ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण के लिए आवश्यक हैं। जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ते रुझान के बीच इन संसाधनों का महत्व और भी बढ़ गया है।
नीतिगत सुधार और उद्योग को बढ़ावा
सरकार ने इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए कई सुधार किए हैं, जिनमें 24 महत्वपूर्ण खनिजों पर आयात शुल्क हटाना शामिल है। साथ ही, तेलंगाना में वैनाडियम और टाइटेनियम युक्त नए ब्लॉकों की नीलामी की योजना है। सरकार पारदर्शिता और व्यवसाय में आसानी सुनिश्चित करने के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा दे रही है।
वैश्विक साझेदारी और भविष्य की दिशा
भारत केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने के प्रयास कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे देशों के साथ साझेदारी के माध्यम से खनिज आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, शहरी खनन (Urban Mining) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक कचरे से खनिजों का पुनः उपयोग किया जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- क्रिटिकल मिनरल्स स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों के लिए आवश्यक होते हैं।
- शहरी खनन में ई-कचरे और औद्योगिक अपशिष्ट से खनिज निकाले जाते हैं।
- ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना भारत के प्रमुख खनिज साझेदार देश हैं।
- “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य आत्मनिर्भर और मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण है।
अंततः, क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भारत की यह रणनीति न केवल आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि हरित ऊर्जा और तकनीकी विकास के क्षेत्र में भी देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी।