के पी उन्नीकृष्णन का निधन
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता के पी उन्नीकृष्णन का 3 मार्च 2026 को केरल के कोझिकोड स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। भारतीय राजनीति में उन्हें एक अनुभवी सांसद, स्पष्टवादी वक्ता और प्रशासनिक समझ रखने वाले नेता के रूप में याद किया जाता है।
लंबा संसदीय सफर
के पी उन्नीकृष्णन छह बार लोकसभा सांसद रहे। उन्होंने 1971 से 1996 तक केरल की वडकारा लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित कांग्रेस के विभिन्न धड़ों और समाजवादी विचारधारा से जुड़े राजनीतिक समूहों से भी संबंधित रहे।
शिक्षा और शुरुआती जीवन
उनका जन्म 20 सितंबर 1936 को हुआ था। उन्होंने चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और कानून की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में आने से पहले उन्होंने पत्रकार के रूप में काम किया, जिससे उनकी लेखन क्षमता और सार्वजनिक मुद्दों की समझ मजबूत हुई।
केंद्रीय मंत्री के रूप में भूमिका
के पी उन्नीकृष्णन 1989 से 1990 तक वी पी सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। उनके पास सतह परिवहन और संचार जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी। 1990 में खाड़ी युद्ध के दौरान भारतीयों की निकासी में उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय मानी जाती है।
केरल और राष्ट्रीय राजनीति में पहचान
उन्नीकृष्णन कई दशकों तक केरल की राजनीति में प्रभावशाली सार्वजनिक चेहरा बने रहे। वे संसद में गंभीर बहस, संवैधानिक मुद्दों की समझ और राष्ट्रीय मामलों पर स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते थे। वडकारा क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन है। ” वडकारा केरल की एक लोकसभा सीट है। ” खाड़ी युद्ध 1990 में इराक द्वारा कुवैत पर आक्रमण के बाद शुरू हुआ था। ” मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज भारत के पुराने उच्च शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है और यह चेन्नई में स्थित है। के पी उन्नीकृष्णन का निधन भारतीय राजनीति के एक अनुभवी अध्याय का अंत है। पत्रकारिता से राजनीति तक की उनकी यात्रा, लंबा संसदीय अनुभव और संकट के समय प्रशासनिक भूमिका उन्हें भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बनाते हैं।