केरल में मत्स्य उद्यमों से आजीविका के नए अवसर

केरल में मत्स्य उद्यमों से आजीविका के नए अवसर

केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार केंद्र ने 2022 से 2026 के बीच केरल के आठ जिलों में मत्स्य क्षेत्र से जुड़े 84 सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने में सहायता की। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से वित्तपोषित इस पहल का उद्देश्य मत्स्य समुदाय की आजीविका के विकल्प बढ़ाना और मूल्य शृंखला में महिलाओं की भागीदारी मजबूत करना है।

मत्स्य समुदाय के लिए आजीविका के विविध विकल्प

इन उद्यमों में मछली उत्पादन और पालन से लेकर प्रसंस्करण तथा विपणन तक की गतिविधियां शामिल हैं। पिंजरा आधारित मछली पालन, पर्ल स्पॉट मछली के बीज का उत्पादन, सजावटी मछली पालन और एकीकृत मत्स्य पालन इस पहल के प्रमुख हिस्से हैं। इसके साथ ही लाभार्थियों को सीप और मसल्स पालन, क्लैम संवर्धन, मछली के मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने, मछली बेचने तथा सूखी मछली तैयार करने जैसे कामों में भी सहायता दी गई।

इस तरह की गतिविधियां मत्स्य क्षेत्र में केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच बनाने के अवसर भी खोलती हैं। परियोजना में महिलाओं और अनुसूचित जाति के मछुआरा समुदायों को विशेष रूप से सहयोग देने पर ध्यान दिया गया। उद्देश्य महिलाओं को उत्पादक, कुशल सेवा प्रदाता और मत्स्य मूल्य शृंखला में उद्यमी के रूप में आगे बढ़ाना है।

प्रशिक्षण और लाभार्थियों तक पहुंच

उद्यम शुरू करने और उन्हें संचालित करने के लिए सीएमएफआरआई ने 141 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें तकनीकी जानकारी के साथ व्यवसाय स्थापित करने और प्रबंधन से जुड़े कौशल भी शामिल थे। प्रशिक्षण का जोर लाभार्थियों को गतिविधि के अनुकूल व्यावहारिक ज्ञान देने पर रहा, ताकि वे पालन, उत्पादन, प्रसंस्करण या बिक्री जैसे कामों को स्वयं आगे बढ़ा सकें।

परियोजना से सीधे 469 लोगों को लाभ मिला, जिनमें 220 महिलाएं और छह ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 2,500 लोगों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लाभार्थियों की घरेलू आय में 30 से 35 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। ये उद्यम केरल के आठ जिलों में स्थापित किए गए हैं।

संस्थान और पहल का महत्व

सीएमएफआरआई भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत कार्य करता है और इसका मुख्यालय कोच्चि में है। वर्ष 1947 में स्थापित यह संस्थान समुद्री मत्स्य और समुद्री जलीय कृषि से जुड़े अनुसंधान के लिए जाना जाता है। इस परियोजना का नेतृत्व सीएमएफआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विपिंकुमार वी.पी. ने किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का वित्तपोषण अनुसंधान संस्थान की विशेषज्ञता को स्थानीय स्तर पर उद्यम विकास से जोड़ने में सहायक बना।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान की स्थापना 1947 में हुई और इसका मुख्यालय कोच्चि, केरल में है।
  • सीएमएफआरआई भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आता है।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की स्थापना 1971 में हुई थी।
  • पर्ल स्पॉट मछली केरल में पाई जाने वाली एक जलीय कृषि प्रजाति है; परियोजना में इसके बीज उत्पादन को शामिल किया गया।

केरल की यह पहल मत्स्य अनुसंधान को स्थानीय उद्यमों और आय के अवसरों से जोड़ती है। प्रशिक्षण, विविध गतिविधियों और लक्षित सहयोग के जरिए यह समुदाय आधारित मत्स्य आजीविका को मजबूत करने का प्रयास है।

Originally written on October 15, 2026 and last modified on October 15, 2026.

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