केरल में निपाह वायरस का संदिग्ध मामला, स्वास्थ्य विभाग सतर्क
केरल के कोझिकोड जिले में 10 जून 2026 को निपाह वायरस संक्रमण का एक संदिग्ध मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। 40 वर्षीय एक व्यक्ति की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट निपाह वायरस के लिए पॉजिटिव पाई गई है। मरीज का उपचार कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है, जहां उसे वेंटिलेटर सहायता पर रखा गया है। अंतिम पुष्टि के लिए नमूने राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे भेजे गए हैं।
निपाह वायरस क्या है?
निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, अर्थात यह जानवरों से मनुष्यों में फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। यह वायरस हेनिपावायरस वंश तथा पैरामिक्सोविरिडी परिवार से संबंधित है। फल खाने वाले चमगादड़, विशेष रूप से प्टेरोपोडिडी परिवार के चमगादड़, इस वायरस के प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में समय-समय पर इसके प्रकोप दर्ज किए गए हैं।
संक्रमण का प्रसार और लक्षण
निपाह वायरस संक्रमित जानवरों, दूषित खाद्य पदार्थों तथा संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क से फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति में बुखार, सिरदर्द, श्वसन संबंधी समस्याएं, भ्रम, चक्कर और गंभीर मामलों में मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) जैसे लक्षण विकसित हो सकते हैं। इस बीमारी की मृत्यु दर अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है, इसलिए शुरुआती पहचान और त्वरित चिकित्सा प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
जांच और पुष्टि की प्रक्रिया
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार मरीज की प्रारंभिक जांच में निपाह संक्रमण के संकेत मिले हैं। हालांकि किसी भी संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि के लिए संदर्भ प्रयोगशाला में विस्तृत परीक्षण आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से मरीज के नमूनों को पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजा गया है। वहां की जांच रिपोर्ट आने के बाद संक्रमण की अंतिम पुष्टि की जाएगी।
केरल सरकार की रोकथाम रणनीति
संभावित संक्रमण की सूचना मिलते ही केरल स्वास्थ्य विभाग ने संपर्क अनुरेखण (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) शुरू कर दिया है। अधिकारियों का उद्देश्य मरीज के संपर्क में आए प्राथमिक और उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान करना है। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण उपायों को मजबूत किया गया है तथा स्वास्थ्यकर्मियों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट उपलब्ध कराई गई हैं। निगरानी, आइसोलेशन और संक्रमण नियंत्रण की रणनीति को सक्रिय रूप से लागू किया जा रहा है।
केरल में निपाह का इतिहास
केरल ने वर्ष 2018 से अब तक कई बार निपाह वायरस के प्रकोप का सामना किया है। 2018, 2019, 2021 और 2023 में राज्य में निपाह संक्रमण के मामले दर्ज किए गए थे। कोझिकोड जिला विशेष रूप से इन घटनाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। पिछले अनुभवों के आधार पर राज्य ने एक प्रभावी निगरानी और प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित की है, जिसके कारण संभावित मामलों की शीघ्र पहचान और नियंत्रण संभव हो पाया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- निपाह वायरस की पहली पहचान वर्ष 1998 में मलेशिया और सिंगापुर में हुए प्रकोप के दौरान हुई थी।
- यह वायरस हेनिपावायरस वंश और पैरामिक्सोविरिडी परिवार से संबंधित है।
- फल खाने वाले चमगादड़ निपाह वायरस के प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं।
- केरल में निपाह के प्रमुख प्रकोप 2018, 2019, 2021 और 2023 में दर्ज किए गए थे।
केरल में सामने आया यह संदिग्ध मामला निपाह वायरस के प्रति निरंतर सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली पिछले अनुभवों के आधार पर तेजी से कार्रवाई कर रही है। अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक निगरानी, संपर्क अनुरेखण और संक्रमण नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित प्रकोप को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।