केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में संशोधन कर उन्नत सेल और जीन थेरेपी को नए नियामक दायरे में लाया

केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में संशोधन कर उन्नत सेल और जीन थेरेपी को नए नियामक दायरे में लाया

भारत सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उभरती आधुनिक उपचार तकनीकों के सुरक्षित और प्रभावी नियमन के उद्देश्य से ड्रग्स नियम, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 29 जून 2026 को अधिसूचित ड्रग्स (आठवां संशोधन) नियम, 2026 को 2 जुलाई 2026 से लागू किया गया। इस संशोधन के तहत एडवांस्ड सेल एवं जीन थेरेपी उत्पादों को केंद्रीय लाइसेंस स्वीकृति प्राधिकरण (सीएलएए) के नियामक ढांचे में शामिल किया गया है। इससे इन अत्याधुनिक जैविक उपचारों के निर्माण, परीक्षण और गुणवत्ता पर देशभर में एक समान निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

ड्रग्स नियम, 1945 क्या हैं?

ड्रग्स नियम, 1945 को ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 के तहत तैयार किया गया था। यह नियम भारत में दवाओं के आयात, निर्माण, वितरण और बिक्री से संबंधित प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इनके अंतर्गत दवाओं के लाइसेंस जारी करने, निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण, लेबलिंग और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े विस्तृत प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। बदलती वैज्ञानिक तकनीकों और स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप समय-समय पर इन नियमों में संशोधन किए जाते रहे हैं।

एडवांस्ड सेल और जीन थेरेपी का महत्व

एडवांस्ड सेल और जीन थेरेपी आधुनिक चिकित्सा की ऐसी तकनीकें हैं जिनमें जीवित कोशिकाओं, स्टेम सेल, आनुवंशिक सामग्री और पशु-जनित जैविक ऊतकों का उपयोग करके गंभीर रोगों का उपचार किया जाता है। इसमें सेल या स्टेम सेल आधारित उत्पाद, जीन थेरेपी उत्पाद तथा जेनोग्राफ्ट शामिल हैं। सीएआर-टी सेल थेरेपी एक उन्नत इम्यूनोथेरेपी है, जिसका उपयोग कुछ प्रकार के रक्त कैंसर के उपचार में किया जाता है। वहीं जीन रिप्लेसमेंट और जीन एडिटिंग तकनीकों का उपयोग चुनिंदा आनुवंशिक रोगों और कुछ कैंसरों के इलाज में किया जाता है।

केंद्रीय लाइसेंस स्वीकृति प्राधिकरण का विस्तारित दायरा

संशोधित नियमों के तहत अब एडवांस्ड सेल और जीन आधारित उपचारों की लाइसेंसिंग और नियामक निगरानी केंद्रीय लाइसेंस स्वीकृति प्राधिकरण के अधीन होगी। इस व्यवस्था में केंद्रीय और राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण संयुक्त रूप से कार्य करेंगे, जिससे पूरे देश में समान नियामक मानकों का पालन सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही ऐसे उत्पादों के निर्माण, गुणवत्ता परीक्षण और बाजार में उपलब्ध होने के बाद उनकी निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

सार्वजनिक परामर्श के बाद लागू हुआ संशोधन

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2025 को राजपत्र अधिसूचना जी.एस.आर. 758(ई) जारी कर प्रस्तावित संशोधन पर जनता और संबंधित हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की थीं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम संशोधन अधिसूचित किया गया। नए नियमों में हृदय रोगों के उपचार में प्रयुक्त पशु-जनित हार्ट वाल्व जैसे जेनोग्राफ्ट उत्पादों को भी नियामक दायरे में शामिल किया गया है। यह संशोधन उन सभी उन्नत उपचारों पर लागू होगा जिनमें जीवित कोशिकाओं, आनुवंशिक सामग्री या पशु-जनित जैविक पदार्थों का उपयोग किया जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940, ड्रग्स नियम, 1945 का मूल कानून है।
  • सीएआर-टी सेल थेरेपी (काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल थेरेपी) कुछ प्रकार के रक्त कैंसर के उपचार में प्रयुक्त उन्नत इम्यूनोथेरेपी है।
  • जेनोग्राफ्ट ऐसे ऊतक या अंग होते हैं जिन्हें एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में प्रत्यारोपित किया जाता है।
  • भारत में राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से कानूनों और नियमों के मसौदे तथा अंतिम संशोधन आधिकारिक रूप से प्रकाशित किए जाते हैं।

ड्रग्स (आठवां संशोधन) नियम, 2026 भारत में आधुनिक जैविक उपचारों के नियमन को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एक समान लाइसेंसिंग प्रणाली, कड़े गुणवत्ता मानकों और प्रभावी निगरानी व्यवस्था से भविष्य में सेल एवं जीन आधारित उपचारों की सुरक्षा, गुणवत्ता और विश्वसनीयता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Originally written on July 3, 2026 and last modified on July 3, 2026.

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