कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने स्पर्म व्हेल की संचार प्रणाली के नए रहस्य उजागर किए
वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सहायता से स्पर्म व्हेल की संचार प्रणाली में महत्वपूर्ण पैटर्न की पहचान की है। शोध के दौरान 156 अलग-अलग प्रकार की कोडा (Codas) तथा बार-बार दोहराए जाने वाले क्लिक अनुक्रम मिले, जो किसी ध्वन्यात्मक (फोनेटिक) प्रणाली की तरह कार्य करते दिखाई देते हैं। यह अध्ययन प्रोजेक्ट सीईटीआई (Project CETI) के अंतर्गत किया गया, जो समुद्री स्तनधारियों की भाषा को समझने के उद्देश्य से वर्ष 2020 में शुरू की गई एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी पहल है। इसका प्रमुख अनुसंधान आधार कैरेबियाई द्वीपीय देश डोमिनिका में स्थित है।
स्पर्म व्हेल की संचार प्रणाली
स्पर्म व्हेल फाइसेटेरिडी (Physeteridae) परिवार की दांतेदार व्हेल है और इसे पृथ्वी की सबसे बड़ी दांतेदार व्हेल माना जाता है। यह सामाजिक संपर्क के लिए कोडा नामक छोटे-छोटे क्लिक अनुक्रमों का उपयोग करती है। वैज्ञानिकों ने वर्ष 2005 से 2018 के बीच पूर्वी कैरेबियन क्षेत्र में लगभग 400 स्पर्म व्हेलों की ध्वनियों का रिकॉर्ड तैयार किया, जिसमें कम-से-कम 60 अलग-अलग व्हेलों के स्वर शामिल थे। इन आंकड़ों के विश्लेषण से उनकी संचार प्रणाली की जटिलता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।
प्रोजेक्ट सीईटीआई और एआई की भूमिका
प्रोजेक्ट सीईटीआई (Cetacean Translation Initiative) में समुद्री जीवविज्ञानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशेषज्ञ, रोबोटिक्स वैज्ञानिक, कंप्यूटर वैज्ञानिक और भाषाविद् मिलकर कार्य कर रहे हैं। 7 मई 2024 को नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में एमआईटी के वैज्ञानिकों ने स्पर्म व्हेल के लिए एक संभावित “फोनेटिक अल्फाबेट” का प्रस्ताव रखा। अध्ययन में दो प्रमुख विशेषताओं की पहचान की गई। पहली “रुबाटो (Rubato)”, जिसमें क्लिक की गति और लय में परिवर्तन देखा गया, तथा दूसरी “ऑर्नामेंटेशन (Ornamentation)”, जिसमें किसी कोडा में एक अतिरिक्त क्लिक जोड़ा जाता है। इन विशेषताओं से संकेत मिलता है कि व्हेल की ध्वनियों में संरचित संचार प्रणाली मौजूद हो सकती है।
नई तकनीक और क्षेत्रीय बोलियां
हाल के अध्ययनों से यह भी पता चला है कि पूर्वी भूमध्यसागर की स्पर्म व्हेल पश्चिमी क्षेत्रों की व्हेलों से अलग क्षेत्रीय बोली (Regional Dialect) का उपयोग करती हैं। दिसंबर 2025 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने प्रोजेक्ट सीईटीआई के सहयोग से एक ओपन-सोर्स बायो-लॉगर विकसित किया, जो व्हेल के शरीर से जुड़कर उच्च गुणवत्ता वाली ध्वनि, व्यवहार और पर्यावरण संबंधी आंकड़े रिकॉर्ड करता है। इसके बाद 1 मई 2026 को वैज्ञानिकों ने एक स्वायत्त पानी के भीतर चलने वाला ग्लाइडर विकसित किया, जो वास्तविक समय में स्पर्म व्हेल का शांतिपूर्वक पीछा करते हुए उनकी आवाजों को रिकॉर्ड कर सकता है। यह तकनीक भविष्य में समुद्री जीवों के व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अनुसंधान का महत्व
स्पर्म व्हेल की संचार प्रणाली पर हो रहे ये अध्ययन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भाषाविज्ञान और समुद्री जीवविज्ञान के बीच सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। हालांकि कुछ समुद्री जीवविज्ञानियों ने यह भी सुझाव दिया है कि रिकॉर्ड की गई कुछ ध्वनियां तकनीकी रिकॉर्डिंग त्रुटियां भी हो सकती हैं। इसके बावजूद यह शोध पशु संचार, जैव विविधता संरक्षण और भविष्य में मानव एवं समुद्री जीवों के बीच संचार को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- स्पर्म व्हेल पृथ्वी की सबसे बड़ी दांतेदार व्हेल है और यह सीटेशिया (Cetacea) गण से संबंधित है।
- कोडा (Codas) स्पर्म व्हेल द्वारा सामाजिक संचार के लिए उपयोग किए जाने वाले क्लिक अनुक्रम हैं।
- नेचर कम्युनिकेशंस प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित समीक्षित (Peer-Reviewed) वैज्ञानिक पत्रिका है।
- डोमिनिका कैरेबियन क्षेत्र का एक द्वीपीय देश है और प्रोजेक्ट सीईटीआई का प्रमुख अनुसंधान आधार है।
स्पर्म व्हेल की संचार प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से प्राप्त नई जानकारियां समुद्री जीवों की भाषा को समझने की दिशा में एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हैं। भविष्य में ऐसे अध्ययन न केवल पशु व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भाषाविज्ञान और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में भी नए अनुसंधान की संभावनाएं खोलेंगे।