कर्नाटक में शराब पर नई कर नीति लागू

कर्नाटक में शराब पर नई कर नीति लागू

कर्नाटक सरकार ने 11 मई 2026 से नई अल्कोहल-इन-बेवरिज यानी एआईबी कर नीति लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत शराब पर लगने वाला उत्पाद शुल्क अब केवल मात्रा के आधार पर नहीं बल्कि पेय पदार्थ में मौजूद वास्तविक अल्कोहल की मात्रा के आधार पर तय किया जाएगा। इसके साथ ही कर्नाटक सरकार ने आबकारी कर की श्रेणियों को 16 से घटाकर 8 कर दिया है।

भारत में शराब पर कर व्यवस्था

भारत में शराब पर लगने वाला उत्पाद शुल्क संविधान के अनुसार राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। राज्य सरकारें आबकारी विभाग के माध्यम से शराब और बीयर पर उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और अन्य कर वसूलती हैं। कर्नाटक ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है जिसने कर प्रणाली को बल्क लीटर के बजाय शराब की वास्तविक अल्कोहल मात्रा से जोड़ दिया है। सरकार का कहना है कि इससे कर ढांचे को अधिक वैज्ञानिक और संतुलित बनाया जा सकेगा।

बीयर और प्रीमियम व्हिस्की हुई सस्ती

नई एआईबी प्रणाली लागू होने के बाद 5 प्रतिशत अल्कोहल वाली माइल्ड और लेगर बीयर की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक कमी आई है। इसमें किंगफिशर प्रीमियम, किंगफिशर अल्ट्रा, बडवाइजर, यूबी एक्सपोर्ट और हाइनेकेन जैसे लोकप्रिय ब्रांड शामिल हैं। इसके अलावा ब्लैक लेबल और चिवास रीगल जैसी प्रीमियम स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में भी लगभग 20 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। इन पेय पदार्थों पर अतिरिक्त आबकारी शुल्क में राहत दी गई है।

सस्ती शराब नहीं, बजट श्रेणी महंगी हुई

नई नीति का असर बजट श्रेणी की भारतीय निर्मित शराब पर उल्टा पड़ा है। 180 मिलीलीटर के टेट्रा पैक में बिकने वाली व्हिस्की, रम, ब्रांडी, जिन और वोडका जैसी शराब की कीमतें 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। कर्नाटक ब्रुअर्स एंड डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार राज्य की लगभग 70 से 75 प्रतिशत आबकारी आय देने वाली शुरुआती पांच कर श्रेणियों में अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। वहीं प्रीमियम शराब वाली श्रेणियों में कर 10 से 15 प्रतिशत तक घटाया गया है।

नीति निर्माण और सार्वजनिक परामर्श

कर्नाटक सरकार ने 18 अप्रैल 2026 को इस नीति का मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया था। इसके बाद 8 मई 2026 को अंतिम अधिसूचना जारी की गई और 11 मई से नई व्यवस्था लागू कर दी गई। सरकार का उद्देश्य शराब उद्योग में कर संरचना को सरल बनाना और राजस्व संग्रह को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” भारत में शराब पर कर लगाने का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है। ” बीयर की ताकत आमतौर पर अल्कोहल बाय वॉल्यूम यानी एबीवी के आधार पर मापी जाती है। ” इंडियन-मेड लिकर भारत में निर्मित घरेलू शराब की प्रमुख श्रेणी है। ” कर्नाटक ने शराब पर कर को वास्तविक अल्कोहल मात्रा से जोड़ने वाली नई प्रणाली अपनाई है। कर्नाटक की नई एआईबी कर नीति को शराब उद्योग में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे प्रीमियम पेय पदार्थों की कीमतों में कमी आई है, जबकि कम कीमत वाली शराब महंगी हुई है। यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी अध्ययन का विषय बन सकता है।

Originally written on May 18, 2026 and last modified on May 18, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *