कर्नाटक के काली टाइगर रिजर्व में फॉरेस्टर मॉथ की नई प्रजाति की खोज
भारत के जैव विविधता अनुसंधान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, पुणे के वैज्ञानिकों ने कर्नाटक के काली टाइगर रिजर्व में फॉरेस्टर मॉथ की एक नई प्रजाति की खोज की है। 17 जून 2026 को घोषित इस खोज के तहत नई प्रजाति का नाम माइम्यूसेमिया काली (Mimeusemia kali) रखा गया है। यह लगभग 30 वर्षों में माइम्यूसेमिया वंश में शामिल की गई पहली नई प्रजाति है, जिससे इस खोज का वैज्ञानिक महत्व और बढ़ जाता है।
फॉरेस्टर मॉथ और माइम्यूसेमिया वंश
फॉरेस्टर मॉथ, ज़ाइगेनिडी (Zygaenidae) परिवार से संबंधित कीट हैं। इस परिवार की विशेषता यह है कि इसके अधिकांश सदस्य दिन के समय सक्रिय रहते हैं, जबकि अधिकांश अन्य पतंगे रात में सक्रिय होते हैं। ये एशिया, यूरोप और अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं। माइम्यूसेमिया वंश वर्तमान में विश्वभर में 30 मान्यता प्राप्त टैक्सा का प्रतिनिधित्व करता है, जिनमें 23 प्रजातियां और 7 उप-प्रजातियां शामिल हैं। नई खोज के बाद इस वंश की वैज्ञानिक जानकारी और अधिक समृद्ध हुई है।
काली टाइगर रिजर्व में हुई खोज
नई प्रजाति की पहचान कर्नाटक के काली टाइगर रिजर्व में की गई, जो पश्चिमी घाट क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण संरक्षित वन क्षेत्र है। यह रिजर्व उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित है और अपनी समृद्ध वनस्पति एवं जीव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। इस अध्ययन का नेतृत्व जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, पुणे की वैज्ञानिक अपर्णा कलावते ने किया। उनके साथ लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के वैज्ञानिक ग्युला एम. लास्ज़लो ने भी सहयोग किया। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से संपन्न यह अध्ययन आधुनिक वर्गिकी (टैक्सोनॉमी) अनुसंधान का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
नई प्रजाति की पहचान कैसे हुई
वैज्ञानिकों ने माइम्यूसेमिया काली को अन्य संबंधित प्रजातियों से अलग पहचानने के लिए इसके शारीरिक स्वरूप, प्रजनन संरचनाओं तथा आनुवंशिक विशेषताओं का विस्तृत अध्ययन किया। इन विशिष्ट लक्षणों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि यह एक नई और अलग प्रजाति है। इस खोज का वैज्ञानिक विवरण अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ज़ूटाक्सा (Zootaxa) में प्रकाशित किया गया है। यह पत्रिका पशु वर्गिकी और नई प्रजातियों के वर्णन से संबंधित शोधों के लिए विश्वभर में जानी जाती है।
जैव विविधता संरक्षण में महत्व
पश्चिमी घाट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में से एक है। यहां अनेक दुर्लभ और स्थानिक प्रजातियां पाई जाती हैं। नई प्रजाति की खोज इस क्षेत्र की समृद्ध जैविक विरासत को रेखांकित करती है और संरक्षण प्रयासों के महत्व को भी उजागर करती है। ऐसी खोजें वैज्ञानिकों को पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर ढंग से समझने और संवेदनशील प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में कार्य करने में मदद करती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) की स्थापना वर्ष 1916 में हुई थी और यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- पश्चिमी घाट को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है और इसे वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट माना जाता है।
- काली टाइगर रिजर्व कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित है और बाघ संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
- ज़ूटाक्सा एक अंतरराष्ट्रीय समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका है, जो पशु वर्गिकी और नई प्रजातियों से संबंधित शोध प्रकाशित करती है।
काली टाइगर रिजर्व में माइम्यूसेमिया काली की खोज भारतीय जैव विविधता अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल पश्चिमी घाट की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि संरक्षित क्षेत्रों में अभी भी अनेक प्रजातियां वैज्ञानिक खोज की प्रतीक्षा कर रही हैं। ऐसी खोजें संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान दोनों के लिए नई संभावनाएं खोलती हैं।